Bageshwar Dham:बागेश्वर धाम के प्रमुख पीठाधीश्वर और प्रसिद्ध कथा वाचक धीरेंद्र शास्त्री ने एक ऐतिहासिक क्षण रचते हुए ब्रिटेन की संसद में "हनुमान चालीसा" का पाठ किया। यह पहला मौका था जब ब्रिटिश संसद के पवित्र कक्ष में किसी भारतीय धार्मिक ग्रंथ का सार्वजनिक पाठ हुआ। धीरेंद्र शास्त्री इन दिनों अपने यूरोप दौरे पर हैं और वहां विभिन्न देशों में सनातन संस्कृति का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। लंदन में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में ब्रिटेन सहित कई देशों के हिंदू समुदाय के लोग, सांसद और अधिकारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
सनातन संस्कृति का मिला सम्मान
ब्रिटिश संसद में आयोजित कार्यक्रम के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने न केवल हनुमान चालीसा का पाठ किया, बल्कि सनातन धर्म की शिक्षाओं और मूल्यों पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने वहां मौजूद सांसदों और अन्य अतिथियों को बताया कि किस प्रकार सनातन धर्म शांति, भाईचारा और मानवता का मार्ग प्रशस्त करता है। उनकी बातों को न केवल ध्यान से सुना गया, बल्कि कई सांसदों ने सनातन संस्कृति के प्रति अपनी रुचि भी व्यक्त की। संसद परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा और भारतीय संस्कृति की झलक स्पष्ट रूप से नजर आई।
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सम्मानित हुए बागेश्वर धाम सरकार
इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के अंत में ब्रिटिश सांसदों ने धीरेंद्र शास्त्री को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों के वैश्विक प्रचार के लिए विशेष सम्मान प्रदान किया। यह सम्मान केवल एक व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि पूरे भारत और उसकी प्राचीन परंपराओं के लिए था। बागेश्वर धाम सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों को वैश्विक मंच पर पहचान मिलने से भारतवासियों में गर्व की लहर दौड़ गई है। धीरेंद्र शास्त्री की यह पहल सनातन धर्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।