Awami League Leaders : बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के करीबी माने जाने वाले 7 वरिष्ठ नेताओं को इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल-2 ने फांसी की सजा सुनाई है। यह फैसला 2024 के सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में आया है। फैसले के बाद बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है।
किन नेताओं को मिली सजा?
फांसी की सजा पाने वालों में अवामी लीग के महासचिव और पूर्व सड़क परिवहन मंत्री ओबैदुल कादर, संयुक्त महासचिव एएफएम बहाउद्दीन नसीम और पूर्व सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री मोहम्मद अली अराफात शामिल हैं। इसके अलावा जुबो लीग के अध्यक्ष शेख फज़ले शम्स पराश, महासचिव मैनुअल हुसैन खान निखिल, बांग्लादेश छात्र लीग के अध्यक्ष सद्दाम हुसैन और महासचिव शेख वली आसिफ एनन को भी मौत की सजा सुनाई गई है।
क्या हैं आरोप?
ट्रिब्यूनल के अनुसार इन नेताओं पर आरोप है कि उन्होंने 2024 के विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए बैठकों में रणनीति बनाई, भड़काऊ बयान दिए और हिंसा को बढ़ावा दिया। जांच में दावा किया गया कि इन लोगों ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सशस्त्र कार्रवाई, दमन और मीडिया नियंत्रण की कोशिशों में भूमिका निभाई। अदालत ने माना कि इन गतिविधियों के कारण देशभर में हत्याएं, हत्या के प्रयास और व्यापक हिंसा हुई।
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पहले हसीना को भी मिल चुकी है सजा
इससे पहले नवंबर 2025 में इसी ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना और उनके पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई थी। अदालत ने माना था कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान बल प्रयोग की जिम्मेदारी शीर्ष नेतृत्व पर थी। हसीना अगस्त 2024 में देश छोड़कर भारत आ गई थीं और तब से यहीं रह रही हैं।
2024 के आंदोलन में क्या हुआ था?
बांग्लादेश में 2024 में बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी आंदोलन हुए थे। इन प्रदर्शनों के दौरान कई जगह हिंसा, झड़पें और सुरक्षा बलों की कार्रवाई देखने को मिली थी। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के अनुमान के मुताबिक 15 जुलाई से 5 अगस्त 2024 के बीच हुई हिंसा में करीब 1,400 लोगों की मौत हुई थी। यही घटनाएं बाद में अंतरराष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल की जांच का आधार बनीं।
राजनीतिक असर पर नजर
7 नेताओं को फांसी की सजा मिलने के बाद बांग्लादेश की राजनीति में तनाव और बढ़ने की संभावना है। अवामी लीग पहले ही दबाव में है और अब उसके कई शीर्ष नेताओं पर सख्त कार्रवाई हुई है। आने वाले दिनों में इस फैसले के खिलाफ कानूनी लड़ाई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर सभी की नजर रहेगी।