भारत और बांग्लादेश के बीच ढाका में खेले गए एशियन कप 2027 क्वालिफायर मुकाबले में भारत को 0-1 से हार का सामना करना पड़ा, और यह हार सिर्फ एक मैच का परिणाम नहीं, बल्कि भारतीय फुटबॉल की पूरी संरचना के पतन की बड़ी तस्वीर बन गई। 22 साल पहले मोतिउमुन्के गोल ने बांग्लादेश को SAFF कप फाइनल में पहुंचाया था, और अब शेख मोर्सालिन के गोल ने भारत को ग्रुप के सबसे निचले पायदान पर धकेल दिया। भारत, जो बांग्लादेश, सिंगापुर और हांगकांग वाले ग्रुप में सभी मैच जीतने का दावेदार माना जा रहा था, वही टीम एक मैच बाकी रहते भी सबसे नीचे पहुंच गई
एशियन कप के लिए क्वालिफाई
सच्चाई यह है कि कोच, खिलाड़ियों या रणनीति की आलोचना अब कोई मायने नहीं रखती, क्योंकि भारत का इस स्तर पर इस ग्रुप में आखिरी स्थान पर आना किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं हो सकता। जहां सिंगापुर जैसे छोटे फुटबॉलिंग देशों ने गेविन ली की कोचिंग में एशियन कप के लिए क्वालिफाई किया, वहीं भारत का संघर्ष बताता है कि पूरे सिस्टम में वर्षों की कमियां किस तरह मैदान पर उजागर हो रही हैं। बांग्लादेश के खिलाड़ी स्थानीय लीग में लगातार खेल रहे थे, इसलिए वे ज्यादा फिट और तैयार दिखे, जबकि भारतीय खिलाड़ी अपने क्लबों की अनिश्चित स्थिति के कारण मैच शार्पनेस से दूर थे
FIFA अप्रूवल लाने में नाकाम
मैच से पहले भारत के लिए एक सकारात्मक उम्मीद थी पूर्व ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी रयान विलियम्स का संभावित डेब्यू लेकिन AIFF, जो पहले से ही लीग मैनेजमेंट और संरचना के संकट में फंसा है, वो समय पर FIFA अप्रूवल लाने में नाकाम रहा. विलियम्स टीम के साथ यात्रा करने के बावजूद मैदान पर नहीं उतर सके. दूसरी ओर, हम्ज़ा चौधरी ने पहले हाफ में शानदार खेल दिखाया गोल बचाने से लेकर मिडफ़ील्ड में नियंत्रण तक लेकिन उनके आसपास वह समर्थन नहीं था जिससे भारत मैच को पलट सके.
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AIFF अपनी गलतियों में उलझा
भारत की हार रणनीति की वजह से थी. कोच खालिद जमील ने भी बदलाव की बात तो कही, लेकिन मैदान पर वही पुराना रवैया देखने को मिला. उन्होंने युवाओं पर भरोसा देर से किया। जब दूसरे हाफ में मोहम्मद सनन मैदान पर आए, तो उनकी रफ्तार, स्किल और दबदबे ने तुरंत बांग्लादेश को मुश्किल में डाल दिया. ब्रिसन फर्नांडिस और महेश सिंह के साथ मिलकर टीम ने खेल का स्तर उठाया, लेकिन तब तक भारत पीछे जा चुका था. आखिरकार भारत की हार सिर्फ 0-1 का स्कोर नहीं, बल्कि पूरे फुटबॉल सिस्टम की असफलता का आईना है. एक ऐसी विफलता, जहां लीग संकट में है, खिलाड़ी अनिश्चित हैं, AIFF अपनी गलतियों में उलझा है, और कोच मैदान पर साहसी फैसले लेने से बचते दिखते हैं.