बांग्लादेशी क्रिकेट पहले ही मुश्किल दौर से गुजर रहा है। टी20 वर्ल्ड कप 2026 से बाहर होने का दर्द अभी ताजा ही था कि अब क्रिकेट बोर्ड ने खिलाड़ियों को एक और झटका दे दिया है। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने एम नजमुल इस्लाम को दोबारा फाइनेंस कमिटी का चीफ बना दिया है। यही वही अधिकारी हैं जिनके बयानों से नाराज होकर खिलाड़ी सड़कों पर उतर आए थे और बीपीएल तक का बहिष्कार कर दिया था।
जिस अधिकारी पर भड़के थे खिलाड़ी
एम नजमुल इस्लाम वही नाम हैं जिनके खिलाफ बांग्लादेश के क्रिकेटरों ने खुलकर मोर्चा खोला था। खिलाड़ियों का आरोप था कि उन्होंने न सिर्फ टीम का अपमान किया बल्कि क्रिकेटरों की मेहनत को भी हल्के में लिया। हालात इतने बिगड़ गए थे कि क्रिकेटर्स वेल्फेयर एसोसिएशन को हड़ताल का ऐलान करना पड़ा और बोर्ड को मजबूरन उन्हें पद से हटाना पड़ा था।
तमीम इकबाल से विवाद ने बढ़ाई आग
नजमुल इस्लाम उस वक्त सुर्खियों में आए जब उन्होंने पूर्व कप्तान तमीम इकबाल को भारत का एजेंट तक कह दिया था। तमीम ने सिर्फ इतना कहा था कि टी20 वर्ल्ड कप को लेकर भावनाओं में नहीं बल्कि ठंडे दिमाग से फैसला लेना चाहिए क्योंकि इसका असर आने वाले 10 सालों तक पड़ेगा। इस बयान पर कई क्रिकेटरों ने तमीम का समर्थन किया था और नजमुल की टिप्पणी की आलोचना की थी।
मुआवजे पर बयान बना बगावत की वजह
मामला तब और बिगड़ा जब नजमुल इस्लाम ने कहा कि अगर बांग्लादेश वर्ल्ड कप में नहीं खेलता तो खिलाड़ियों को किसी तरह का मुआवजा नहीं मिलेगा। उन्होंने यहां तक कह दिया कि खिलाड़ियों ने अब तक कोई आईसीसी ट्रॉफी नहीं जीती है इसलिए मुआवजे का सवाल ही नहीं उठता। इस बयान से खिलाड़ियों का गुस्सा फूट पड़ा और बीपीएल के बहिष्कार का ऐलान कर दिया गया।
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बगावत के आगे झुका था बोर्ड
खिलाड़ियों के एकजुट विरोध के बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने आनन फानन में नजमुल इस्लाम को फाइनेंस कमिटी चीफ के पद से हटा दिया था। बोर्ड ने साफ कहा था कि वह खिलाड़ियों के साथ है। इसके बाद क्रिकेटरों ने अपना बहिष्कार खत्म किया और बीपीएल दोबारा खेलना शुरू किया। उस वक्त लगा था कि खिलाड़ियों की आवाज सुनी गई है।
बीपीएल खत्म होते ही बदला फैसला
अब बीपीएल खत्म होते ही बोर्ड ने वही नजमुल इस्लाम दोबारा उसी पद पर बैठा दिए हैं। बोर्ड का कहना है कि कारण बताओ नोटिस का जवाब संतोषजनक था। लेकिन खिलाड़ियों के लिए यह फैसला किसी विश्वासघात से कम नहीं है। अब देखना होगा कि बांग्लादेशी क्रिकेटर इस फैसले पर क्या रुख अपनाते हैं क्योंकि बीपीएल का बहिष्कार करने का रास्ता भी फिलहाल बंद हो चुका है। इतना तय है कि बांग्लादेश क्रिकेट में विवाद की आग फिर से भड़क चुकी है।