बांग्लादेश में 12 फरवरी को संसदीय चुनाव होने जा रहे हैं, लेकिन उससे पहले ही एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। 9 फरवरी को मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार अमेरिका के साथ एक अहम व्यापार समझौता करने की तैयारी में है। चुनाव से ठीक 3–4 दिन पहले इस तरह की डील को लेकर देश में सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि अंतरिम सरकार आखिर इतनी जल्दी में अमेरिका से क्या समझौता करना चाहती है।
गुप्त शर्तों ने बढ़ाई चिंता
ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, इस ट्रेड डील की शर्तें बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने तैयार कर ली हैं, लेकिन उन्हें सार्वजनिक नहीं किया गया है। यही वजह है कि इस डील को “गुप्त समझौता” कहा जा रहा है। कई अर्थशास्त्री और राजनीतिक जानकार इसे गलत समय पर लिया गया फैसला बता रहे हैं। उनका सवाल है कि जब कुछ ही दिनों में नई सरकार बनने वाली है, तो इतने बड़े फैसले की जरूरत क्यों पड़ी।
क्या अगली सरकार बंध जाएगी?
बांग्लादेश में बहस इस बात को लेकर भी है कि क्या मोहम्मद यूनुस कोई ऐसा लंबी अवधि वाला सौदा करने जा रहे हैं, जिसका असर अगली चुनी हुई सरकार पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि टैरिफ, आयात और सरकारी खरीद से जुड़े समझौते कई सालों तक नीति की आज़ादी को सीमित कर सकते हैं। इसलिए ऐसे फैसले अगली सरकार पर छोड़ देना ज्यादा बेहतर होता।
अमेरिकी टैरिफ और सरकार का तर्क
बांग्लादेश पर इस समय अमेरिका की ओर से करीब 20 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाता है। सरकार चाहती है कि रेडीमेड गारमेंट्स पर जीरो टैरिफ मिले, क्योंकि बांग्लादेश सबसे ज्यादा कपड़े अमेरिका और यूरोप को निर्यात करता है। देश के वाणिज्य सलाहकार एसके बशीर उद्दीन ने कहा है कि बांग्लादेश अतिरिक्त अमेरिकी टैरिफ में कटौती चाहता है, लेकिन डील के संभावित नतीजों पर उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
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ट्रंप फैक्टर से बढ़ा डर
बांग्लादेश के कई विशेषज्ञों को डर है कि अगर मोहम्मद यूनुस ने अमेरिका के पक्ष में कोई एकतरफा सौदा कर लिया, तो अगली सरकार के लिए डोनाल्ड ट्रंप से दोबारा बातचीत करना मुश्किल हो जाएगा। इससे दोनों देशों के रिश्तों में तनाव भी आ सकता है। इसी वजह से मांग की जा रही है कि सरकार इस डील की शर्तें जनता के सामने साफ-साफ रखे।
अमेरिकी नजरिया क्या कहता है
वॉशिंगटन स्थित अटलांटिक काउंसिल के सीनियर फेलो माइकल कुगेलमैन ने कहा है कि ट्रंप प्रशासन विदेश नीति को ज्यादा व्यावसायिक नजरिए से देखता है। उनके लिए लोकतंत्र और मानवाधिकार से ज्यादा अहम व्यापार और टैरिफ होते हैं। ऐसे में बांग्लादेश में चुनाव किस तरह होते हैं, यह ट्रंप प्रशासन के लिए उतना बड़ा मुद्दा नहीं होगा। यही वजह है कि यह ट्रेड डील अब सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है।