बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा और दीपू चंद्र दास की मॉब लिंचिंग के बाद राजधानी दिल्ली का माहौल भी गरमा गया है। मंगलवार को विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और अन्य हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने चाणक्यपुरी स्थित बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने बैनर और पोस्टर हाथ में लेकर नारेबाजी की और बांग्लादेश सरकार से हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। उनका कहना था कि पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमले अब बर्दाश्त नहीं किए जा सकते।
#WATCH | Delhi | Members of Vishva Hindu Parishad and other Hindu organisations protest near the Bangladesh High Commission over the atrocities against Hindus and the mob lynching of Dipu Chandra Das in Bangladesh pic.twitter.com/0nrtZ3XWYG
— ANI (@ANI) December 23, 2025
हाई कमीशन के बाहर सख्त सुरक्षा घेरा
प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस पहले से ही अलर्ट मोड में थी। बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर तीन स्तर की बैरिकेडिंग की गई और भारी संख्या में पुलिस व अर्धसैनिक बल तैनात किए गए। सड़क के दोनों ओर बैरिकेड्स लगाए गए और पूरे इलाके पर सीसीटीवी कैमरों से नजर रखी गई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका और कई लोगों को हिरासत में भी लिया। बाद में विश्व हिंदू परिषद की अपील पर प्रदर्शन को खत्म करने को कहा गया, जिसके बाद हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं को ले जाती बस आगे बढ़ी।
ये भी पढ़ें : December का अलर्ट बज चुका है, 31 दिसंबर से पहले ये काम नहीं किए तो टैक्सपेयर्स पर गिर सकती है बड़ी मार
पहले भी रोके गए थे प्रदर्शनकारी
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इससे पहले शनिवार को भी 15 से 20 प्रदर्शनकारी बांग्लादेश हाई कमीशन के पास पहुंचे थे, जिन्हें कुछ ही मिनटों में हटा दिया गया था। उस दौरान कुछ लोगों से पूछताछ भी की गई थी। मंगलवार को भी पुलिस ने वही रणनीति अपनाई और प्रदर्शनकारियों को दुर्गाबाई देशमुख साउथ कैंपस मेट्रो स्टेशन के पास ही रोक लिया गया, ताकि स्थिति नियंत्रण में बनी रहे और किसी तरह की अव्यवस्था न हो।
कूटनीतिक तनाव और बढ़ी चिंता
इन घटनाओं के बीच बांग्लादेश सरकार ने भारत में अपने राजनयिक मिशनों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भारतीय उच्चायुक्त के सामने नई दिल्ली और सिलीगुड़ी में हुए घटनाक्रम पर आपत्ति दर्ज कराई। बयान में कहा गया कि राजनयिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ किसी भी तरह की धमकी या हिंसा अस्वीकार्य है। उधर, ढाका स्थित भारतीय दूतावास की सुरक्षा भी कड़ी कर दी गई है। दूतावास के बाहर हथियारबंद पुलिस और सेना की तैनाती की गई है। दीपू चंद्र दास की हत्या के बाद यह मामला अब सिर्फ कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक संवेदनशील कूटनीतिक मुद्दा बन गया है।