जिन टैक्सपेयर्स ने तय समय सीमा तक इनकम टैक्स रिटर्न फाइल नहीं किया था, उनके लिए 31 दिसंबर आखिरी मौका है। इस तारीख के बाद न तो बिलेटेड ITR फाइल किया जा सकेगा और न ही किसी तरह का रिफंड क्लेम किया जा सकेगा। आयकर विभाग साफ कर चुका है कि डेडलाइन निकलने के बाद रिटर्न न भरने पर कानूनी नोटिस, ब्याज और जुर्माने की कार्रवाई हो सकती है। ऐसे में जिन लोगों का रिटर्न अब तक लंबित है, उनके लिए देरी करना भारी पड़ सकता है।
लेट फीस कितनी देनी होगी
बिलेटेड ITR फाइल करने पर आय के हिसाब से लेट फीस तय की गई है। अगर आपकी सालाना आय 5 लाख रुपये से कम है, तो 1000 रुपये की लेट फीस देनी होगी। वहीं जिनकी आय 5 लाख रुपये या उससे ज्यादा है, उन्हें 5000 रुपये तक की लेट फीस चुकानी पड़ेगी। बिना लेट फीस के ITR फाइल करने की आखिरी तारीख 16 सितंबर थी। 31 दिसंबर के बाद रिटर्न न भरने पर रिफंड का अधिकार पूरी तरह खत्म हो जाएगा, चाहे रिफंड राशि कितनी भी क्यों न हो।
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बिलेटेड ITR भरने का आसान तरीका
बिलेटेड ITR फाइल करने के लिए सबसे पहले आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर लॉगिन करें। पैन और आधार के जरिए लॉगिन करने के बाद ‘फाइल ITR’ विकल्प चुनें। इसके बाद असेसमेंट ईयर सेलेक्ट करें और ऑनलाइन फाइलिंग का विकल्प लें। अपनी कैटेगरी और सही ITR फॉर्म चुनने के बाद पर्सनल डिटेल्स वेरीफाई करें। Filing Section में धारा 139(4) को सेलेक्ट करें। अब इनकम और डिडक्शन की जानकारी भरकर सबमिट करें और ओटीपी के जरिए ई-वेरिफिकेशन पूरा करें।
रिवाइज्ड और बिलेटेड ITR में अंतर
अक्सर टैक्सपेयर्स रिवाइज्ड और बिलेटेड ITR को लेकर भ्रम में रहते हैं। अगर आपने समय पर ITR फाइल किया था लेकिन बाद में कोई गलती सामने आई, तो आप रिवाइज्ड ITR फाइल कर सकते हैं, जिस पर कोई लेट फीस नहीं लगती। वहीं तय तारीख के बाद पहली बार रिटर्न भरने वालों को बिलेटेड ITR फाइल करना होता है। इसमें लेट फीस लगती है और कुछ टैक्स लाभ भी नहीं मिलते। इसलिए बेहतर है कि 31 दिसंबर से पहले ही रिटर्न फाइल कर लिया जाए।