पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए भाबानीपुर सिर्फ एक सीट नहीं, बल्कि राजनीतिक ताकत का सबसे मजबूत किला माना जाता रहा है। लेकिन अब इसी गढ़ में SIR के बाद ऐसा झटका लगा है, जिसने तृणमूल कांग्रेस को चौंका दिया है। करीब 45 हजार वोटरों के नाम कटने की खबर सामने आते ही पार्टी के भीतर हड़कंप मच गया। जिस सीट को अब तक सबसे सुरक्षित समझा जाता था, वहीं अब खतरे के संकेत दिखने लगे हैं। सवाल यह नहीं कि नाम कटे, बल्कि यह कि इसका असर आगे कितना गहरा होगा।
SIR के बाद कैसे बदली तस्वीर
विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद जब ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी हुई, तो आंकड़े चौंकाने वाले थे। सिर्फ भाबानीपुर ही नहीं, बल्कि कोलकाता की चार हाई-प्रोफाइल विधानसभा सीटों से कुल 2 लाख 16 हजार से ज्यादा नाम हटाए गए हैं। यह कुल वोटरों का लगभग 24 प्रतिशत है। भाबानीपुर में जहां पहले 2 लाख से ज्यादा वोटर थे, अब संख्या घटकर करीब 1 लाख 61 हजार रह गई है। इतनी बड़ी कटौती ने TMC को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या यह महज प्रशासनिक प्रक्रिया है या इसके राजनीतिक मायने भी हैं।
ममता को कितना नुकसान संभव
पिछले चुनाव में भाबानीपुर से ममता बनर्जी को 85 हजार से ज्यादा वोट मिले थे। अब जब 45 हजार नाम लिस्ट से बाहर हो चुके हैं, तो सीधा असर वोट बैंक पर पड़ता दिख रहा है। TMC का दावा है कि हटाए गए नामों में बड़ी संख्या उनके पारंपरिक समर्थकों की है, जो सालों से इसी इलाके में रह रहे हैं और नियमित रूप से वोट डालते आए हैं। पार्टी को डर है कि अगर ये नाम दोबारा नहीं जुड़े, तो ममता की जीत का अंतर घट सकता है और मुकाबला पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
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TMC का पलटवार और आगे की सियासत
इस संकट के बाद तृणमूल कांग्रेस ने आक्रामक रुख अपनाया है। बूथ लेवल एजेंटों को घर-घर जाकर सत्यापन की जिम्मेदारी दी गई है और हर कटे नाम पर आपत्ति दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही ‘मे आई हेल्प यू’ कैंप चलाकर लोगों की मदद की जा रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस पूरी प्रक्रिया से बीजेपी को फायदा होगा। विपक्ष इसे वोटर लिस्ट की सफाई बता रहा है, जबकि TMC इसे अपने खिलाफ साजिश मान रही है। ममता बनर्जी को डर है कि अगर यह प्रक्रिया आगे बढ़ी, तो और नाम भी कट सकते हैं। यही वजह है कि भाबानीपुर से शुरू हुई यह कहानी अब पूरे बंगाल की राजनीति को प्रभावित करती नजर आ रही है।