उत्तर प्रदेश में 2027 के चुनाव से पहले अचानक राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और RSS नेतृत्व के बीच लखनऊ के कालिदास मार्ग आवास पर करीब तीन घंटे की गुप्त बैठक हुई, जिसकी चर्चा अब दिल्ली तक फैल चुकी है. सूत्रों के मुताबिक यह बैठक अब तक की सबसे अहम रणनीतिक मीटिंग थी. इसमें यूपी की जातिगत राजनीति, हिंदुत्व की नई लाइन और चुनावी प्लानिंग को लेकर बड़ा ब्लूप्रिंट तैयार किया गया. जानकारों का दावा है कि यह पूरा प्लान सपा के PDA फॉर्मूले का जवाब माना जा रहा है और विपक्ष को सीधा झटका देने वाला है.
हिंदू सम्मेलन बना बैठक का मुख्य केंद्र
बैठक में सबसे अधिक चर्चा जनवरी 2026 में लखनऊ में होने वाले विशाल हिंदू सम्मेलन पर हुई. यह सम्मेलन संघ के शताब्दी वर्ष कार्यक्रमों का हिस्सा होगा और इसे BJP का सबसे बड़ा राजनीतिक कार्ड माना जा रहा है. इसमें RSS के पंच प्रण सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी आचरण और नागरिक कर्तव्य—को पूरे प्रदेश में फैलाने की रणनीति पर काम हुआ. सूत्र बताते हैं कि इस बड़े आयोजन में योगी को हिंदुत्व के प्रमुख चेहरे के रूप में स्थापित किया जाएगा, जिससे 2027 की लड़ाई में उन्हें और मजबूत किया जा सके. इसी तैयारी ने विरोधियों की चिंता बढ़ा दी है.
संगठन और सरकार में बड़े बदलाव के संकेत
बैठक का फोकस सिर्फ सम्मेलन नहीं था. इसमें विधायकों की सक्रियता, कमजोर परफॉर्मेंस और SIR मॉडल पर कड़ी समीक्षा हुई. कई विधायकों और मंत्रियों को चेतावनी देने की योजना भी बनाई गई. बीजेपी अब 2027 के लिए माइक्रो-मैनेजमेंट मोड में लौट रही है, वही मॉडल जिसने 2017 और 2022 में करिश्माई नतीजे दिए थे. सूत्रों का कहना है कि संगठन में बड़े फेरबदल की तैयारी है. नया प्रदेश अध्यक्ष चुनने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और मंत्रिमंडल में बदलाव की भी चर्चा है. साथ ही निगमों, बोर्डों और आयोगों में पुराने अनुभवी कार्यकर्ताओं को जगह देने का निर्णय भी लिया गया है.
इसे भी पढ़ें : लोकसभा–राज्यसभा में हंगामा तेज: SIR मुद्दे पर विपक्ष का जोरदार विरोध, ‘वोट चोर–गद्दी छोड़’ के नारे से गूंजा संसद
विपक्ष क्यों हो रहा है बेचैन?
राजनीतिक विशेषज्ञों का दावा है कि RSS और योगी सरकार जिस गति से प्लानिंग कर रहे हैं, वह किसी बड़े चुनावी तूफान का संकेत है. हिंदू समाज को एक मंच पर लाने की रणनीति, सम्मेलन से पहले सैकड़ों छोटे कार्यक्रमों की तैयारी और संगठन–सरकार–संघ का समन्वय, ये सब विपक्ष के लिए बड़े खतरे के संकेत हैं. इस संयुक्त रणनीति ने संकेत दे दिया है कि बीजेपी 2027 में सिर्फ चुनाव नहीं लड़ने, बल्कि विपक्ष को पूरी तरह घेरने की तैयारी कर चुकी है. अब सभी की नजर इस पर है कि भागवत और योगी अगला कदम कब और क्या उठाते हैं, क्योंकि इस बैठक ने यूपी की राजनीति का पूरा तापमान बढ़ा दिया है.