
बिहार की राजनीति आज पूरे दिन गर्म रही। एनडीए की ओर से बिहार बंद का ऐलान किया गया था और राजधानी पटना में इसका असर साफ देखने को मिला। सुबह से ही बीजेपी दफ्तर के बाहर नेताओं और कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगने लगा। पार्टी कार्यकर्ता हाथों में झंडा लिए नारेबाजी कर रहे थे, वहीं ऑफिस के बाहर लगाए गए पोस्टर विरोध की तस्वीर बयां कर रहे थे।
इनकम टैक्स गोलंबर पर जाम
सबसे बड़ा नज़ारा पटना के इनकम टैक्स गोलंबर पर देखने को मिला, जहां बीजेपी कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध किया और सड़क को जाम कर दिया। इस दौरान महिला कार्यकर्ताओं का जोश देखने लायक था। वे लगातार नारे लगाती रहीं और प्रदर्शन में सबसे आगे नजर आईं। विरोध जताते हुए कार्यकर्ताओं ने डाकबंगला चौराहा तक पैदल मार्च करने का ऐलान किया। प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस-प्रशासन भी अलर्ट रहा और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई।
महिला मोर्चा ने संभाली कमान
इस बार के बिहार बंद की खासियत यह रही कि इसका नेतृत्व बीजेपी महिला मोर्चा ने किया। सड़क पर उतरीं महिला कार्यकर्ताओं ने पीएम नरेंद्र मोदी के सम्मान की मांग उठाई और कहा कि महिलाओं की आवाज अब अनसुनी नहीं की जा सकती। बीजेपी नेताओं ने इस बंद को “महिलाओं की शक्ति का प्रदर्शन” बताया। उनका कहना है कि पटना की सड़कों पर महिला कार्यकर्ताओं की मौजूदगी से यह साफ हो गया है कि पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊंचा है और वे अपने नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़े हैं।
ये भी पढ़ें : Nitish का चुनावी मास्टर स्ट्रोक, 7 बड़ी सौगातें दीं, महिलाओं पर तगड़ा फोकस, चुनावी समीकरण बदलने की तैयारी
एनडीए की रणनीति पर नजर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार बंद के जरिए बीजेपी और एनडीए ने दो संदेश देने की कोशिश की है—पहला, संगठन की मजबूती और दूसरा, महिला शक्ति के सहारे जनसमर्थन जुटाने की रणनीति। हाल ही में महिलाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर सियासत तेज हुई है और बीजेपी ने इसे आंदोलन का चेहरा बनाकर विपक्ष को चुनौती दी है।
पटना बना विरोध का केंद्र
सुबह से ही पटना के प्रमुख इलाकों में बीजेपी कार्यकर्ताओं का जमावड़ा रहा। शहर के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन और नारेबाजी होती रही। कई जगहों पर ट्रैफिक जाम के कारण लोगों को दिक्कत भी झेलनी पड़ी। हालांकि, पार्टी नेताओं का कहना है कि यह बंद जनता की आवाज उठाने के लिए है और इसमें महिला कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी ने इसे खास बना दिया।
आज का यह बिहार बंद न केवल एनडीए की एकजुटता दिखाने का प्रयास था, बल्कि यह भी साबित करता है कि आने वाले दिनों में चुनावी समीकरणों में महिलाओं की भूमिका अहम रहने वाली है।