
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 नजदीक आते ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पत्ते खोल दिए हैं। चुनावी रैलियों और वादों के बजाय नीतीश इस बार योजनाओं को सीधे जमीन पर उतारने में जुट गए हैं। खासतौर पर, उनका ध्यान महिलाओं पर केंद्रित है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश ने यह रणनीति पहले ही तय कर ली थी और अब वे उसे अमल में ला रहे हैं। वजह साफ है कि 2025 के चुनाव में महिला मतदाता ही असली गेमचेंजर साबित हो सकती हैं।
नीतीश की 7 बड़ी सौगातें महिलाओं को
पिछले दो महीनों में सरकार ने ऐसी सात घोषणाएं की हैं, जो सीधे महिलाओं के जीवन पर असर डालेंगी। रोजगार, आर्थिक मदद, सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में महिलाओं को मजबूत बनाने की दिशा में ये फैसले लिए गए हैं।
जीविका दीदियों को राहत- 1.40 लाख जीविका कर्मियों का मानदेय दोगुना और बैंक लोन पर ब्याज 10 फीसदी से घटाकर 7 फीसदी कर दिया गया।
कन्या विवाह मंडप योजना- 8,053 पंचायतों में विवाह मंडप, जिसकी देखरेख की जिम्मेदारी महिलाओं को सौंपी गई।
आशा और ममता कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ा- अब 1.20 लाख से अधिक महिलाएं सीधे लाभान्वित होंगी।
आंगनबाड़ी सेविकाओं को डिजिटल सहयोग- मोबाइल खरीदने के लिए 11,000 रुपये की मदद।
मुख्यमंत्री महिला स्वरोजगार योजना- हर परिवार की एक महिला को 10,000 रुपये अनुदान और सफल होने पर 2 लाख रुपये तक का लोन।
रसोइयों का मानदेय दोगुना- स्कूलों में काम करने वाली महिलाओं को अब 3,300 रुपये मानदेय दिया जाएगा।
महिला आरक्षण और डोमिसाइल नीति- पंचायतों में 50% आरक्षण और सरकारी नौकरियों में 35% आरक्षण का फायदा।
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क्यों महिलाओं पर है नीतीश का फोकस?
बिहार में महिला मतदाताओं का आंकड़ा 3.39 करोड़ से ज्यादा है। 2020 के चुनाव में पुरुषों से 6% ज्यादा महिलाओं ने मतदान किया था। तब 54% पुरुषों के मुकाबले 60% महिलाओं ने वोट डाला था। यही वजह है कि इस बार भी महिला वोटरों को साधने की कवायद तेज हो गई है।
जीविका योजना और स्वरोजगार जैसी योजनाओं ने ग्रामीण महिलाओं की भूमिका परिवार और समाज में और मजबूत की है। वे न केवल घर संभाल रही हैं बल्कि अब आर्थिक फैसलों में भी भागीदारी निभा रही हैं। यही बदलाव नीतीश के लिए चुनावी बैलेट बॉक्स में सोना साबित हो सकता है।
चुनावी समीकरण पर असर
नीतीश कुमार की इन घोषणाओं को राजनीतिक विशेषज्ञ चुनावी मास्टर स्ट्रोक मान रहे हैं। महिलाओं की भागीदारी और समर्थन न सिर्फ नीतीश की राजनीतिक जमीन मजबूत करेगा बल्कि विपक्ष को भी चुनौती देगा। अब देखना होगा कि क्या 2025 में महिलाएं वाकई नीतीश की जीत का रास्ता तय करती हैं।