
बिहार विधानसभा चुनावों का बिगुल बज चुका है. जिसको लेकर सभी पार्टियों ने अपनी कमर कस ली है. वहीं दूसरी ओर NDA के अंदर सीट बंटवारे को लेकर मतभेद गहरे होते जा रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक चिराग पासवान को खुश रखने के लिए अगर उनकी पार्टी LJP (रामविलास) को अधिक सीटें दे दीं जाती हैं तो इसका खामियाजा जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा को चुकाना पड़ सकता है. भारतीय जनता पार्टी ये चाहती है कि सभी दलों में एकमत बन जाए, लेकिन अब तक किसी फॉर्मूले को लेकर सहमति नहीं बन सकी है.
205 सीटों पर बीजेपी और जेडीयू मिलकर लड़ेंगी चुनाव
दरअसल बिहार की 243 विधानसभा सीटों में से 205 सीटों पर बीजेपी और जेडीयू मिलकर चुनाव लड़ने की योजना बना रहे हैं. सूत्रों की मानें तो दोनों दलों के बीच में 102-102 सीटों को लेकर समझौता लगभग तय है, जबकि शेष 38 सीटें छोटे सहयोगी दलों में बांट दी जाएंगी. इस फॉर्मूले के तहत LJP (रामविलास) को 25, HAM (मांझी) को 7, और RLM (कुशवाहा) को 6 सीटें देने का प्रस्ताव है. मगर चिराग पासवान कुछ और पसंदीदा सीटें चाहते हैं.
पार्टी नेताओं के लिए कुछ खास सीट चाहते हैं चिराग
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार चिराग पासवान कुछ खास सीटें अपनी पार्टी के नेताओं के लिए चाहते हैं, जिन पर बीजेपी और जेडीयू राज़ी नहीं हो रहीं हैं. यही कारण है कि सीट बंटवारे को लेकर अंतिम फैसला टलता चला जा रहा है. ऐसे में अगर LJP की सीटें बढ़ानी पड़ गईं, तो मांझी और कुशवाहा की सीटें घट सकती हैं. ऐसे में छोटे दलों की नाराज़गी से बचने के लिए बीजेपी उन्हें राज्यसभा या विधान परिषद की सीटें देने का ऑफर देने पर सोच-विचार कर रही है.
दिल्ली में बीजेपी नेताओं के साथ चिराग ने की बैठक
वहीं दिल्ली में मंगलवार को बीजेपी नेताओं धर्मेंद्र प्रधान और विनोद तावड़े ने चिराग पासवान से मुलाकात की. इस बैठक में सीट बंटवारे को लेकर गहन चर्चा- परिचर्चा की गई, लेकिन कोई अंतिम समझौता अब तक नहीं हो सका है. सूत्रों के अनुसार अगर आज कोई सहमति नहीं बन पाती है तो बातचीत कल शाम तक के लिए टल सकती है.
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दिल्ली से सीधे पटना रवाना हो जाएंगे चिराग
बताया जा रहा है कि इस बैठक के बाद चिराग पासवान दिल्ली से पटना के लिए रवाना हो जाएंगे, जहां वे खगड़िया के शहरबन्नी गांव में अपने पिता रामविलास पासवान की पुण्यतिथि के कार्यक्रम में शिरकत करेंगे. जबकि एनडीए की सीट बंटवारे की बातचीत जारी रहेगी, क्योंकि सभी दल अब जल्द से जल्द चुनावी रणनीति तय करना चाहते हैं.