जिस बिहार को कभी अपराध और माफिया राज के लिए जाना जाता था, वहां अब कानून की सख्ती की चर्चा हर गली-चौराहे पर हो रही है। गृह मंत्री सम्राट चौधरी के जिम्मा संभालते ही साफ संकेत मिल गया कि अब राज्य पुराने डर के दौर में नहीं लौटेगा। पुलिस और प्रशासन को खुला संदेश है कि अपराध पर किसी तरह की ढिलाई नहीं चलेगी। आम लोग महसूस करने लगे हैं कि सरकार सिर्फ कागजों में नहीं, जमीन पर काम कर रही है।
अपराधियों की बदली हालत
जो अपराधी और माफिया पहले थानों को ठेंगा दिखाते थे, आज वही घरों में दुबके नजर आ रहे हैं। रंगदारी, जमीन कब्जा और अवैध धंधों पर लगातार कार्रवाई से उनके हौसले पस्त हुए हैं। पुलिस की सक्रियता बढ़ी है और आम आदमी को भरोसा होने लगा है कि शिकायत करने पर अब उसे डरना नहीं पड़ेगा।
योगी मॉडल की छाया
बिहार में हो रही सख्ती की तुलना लोग उत्तर प्रदेश के योगी मॉडल से करने लगे हैं। वहां जिस तरह अपराधियों पर सख्त कार्रवाई और जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई, उसी तरह की सोच अब बिहार में भी दिखाई दे रही है। संदेश साफ है कि अपराध चाहे छोटा हो या बड़ा, कानून से ऊपर कोई नहीं।
माफिया राज पर सीधी चोट
बिहार में लंबे समय तक जमीन, बालू और शराब माफिया राजनीति की छांव में फलते-फूलते रहे। गरीब आदमी थाने जाने से डरता था। अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। सरकार का कहना है कि जाति, धर्म या राजनीतिक पहचान देखकर नहीं, बल्कि अपराध देखकर कार्रवाई होगी। इससे माफियाओं की जड़ें हिलती दिख रही हैं।
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जनता के मन में बढ़ता भरोसा
सबसे बड़ा बदलाव जनता के मन में दिख रहा है। जो लोग पहले डर के कारण चुप रहते थे, अब खुलकर कानून व्यवस्था के सख्त फैसलों का समर्थन कर रहे हैं। गांवों और कस्बों में चर्चा है कि अगर यही रफ्तार रही तो अपराधियों की अवैध संपत्तियां भी नहीं बचेंगी।
आगे और सख्ती के संकेत
सम्राट चौधरी के नेतृत्व में गृह विभाग का यह रुख सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि साफ राजनीतिक संदेश भी है। बिहार अब अपराध के साथ समझौता नहीं करेगा। आने वाले दिनों में अगर यही नीति जारी रही, तो राज्य की कानून व्यवस्था की तस्वीर और मजबूत होती नजर आएगी।