
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर एनडीए गठबंधन के दो बड़े दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने उम्मीदवारों के चयन में गजब की तालमेल दिखाई है. दोनों पार्टियों ने अपने-अपने कोर वोट बैंक को साधते हुए जातीय संतुलन पर खास ध्यान दिया है. जहां बीजेपी ने सवर्ण वोटरों को प्राथमिकता दी है, वहीं जेडीयू ने ओबीसी और ईबीसी वर्ग पर फोकस किया है.
बिहार में 101 सीटों पर चुनाव लड़ेगी बीजेपी
एनडीए सीट शेयरिंग के तहत बीजेपी बिहार में 101 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. पार्टी ने 71 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की है, जिसमें सवर्ण वर्ग को बड़ा हिस्सा दिया गया है. इन 71 प्रत्याशियों में 34 उम्मीदवार सवर्ण समाज से हैं. जिनमें राजपूत 15, भूमिहार 11, ब्राह्मण 7, वैश्य 8 और कायस्थ समाज के 1 प्रत्याशी शामिल हैं. इसके साथ ही बीजेपी की लिस्ट में ओबीसी वर्ग के 20 और ईबीसी वर्ग के 11 उम्मीदवारों को भी टिकट दिया गया है. ओबीसी में वैश्य समाज को सबसे ज्यादा 8 सीटें मिली हैं, जबकि यादव और कुशवाहा समाज के 4-4 उम्मीदवारों को मौका दिया गया है. कुर्मी समुदाय से 3 और दांगी समाज से एक उम्मीदवार को टिकट दिया गया है. इससे साफ है कि बीजेपी ने अपने पारंपरिक सवर्ण आधार को मजबूत रखने के साथ-साथ पिछड़े वर्ग को भी प्रतिनिधित्व दिया है.
जेडीयू ने किया लव-कुश समीकरण पर फोकस
एनडीए के दूसरे बड़े घटक दल जेडीयू भी 101 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. पार्टी ने अपनी 57 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की है, जिसमें लव-कुश (कुर्मी-कुशवाहा) समाज को प्राथमिकता दी गई है. जेडीयू ने 23 उम्मीदवार इस समुदाय से चुने हैं, जिन्हें नीतीश कुमार का कोर वोटर माना जाता है. इसके अलावा जेडीयू ने अति पिछड़ा वर्ग (EBC) से 9 उम्मीदवार और दलित समाज से 12 प्रत्याशी उतारे हैं. पार्टी ने 27 नए चेहरे शामिल किए हैं, यानी आधे से ज्यादा पुराने उम्मीदवारों के टिकट काटे गए हैं. यह बदलाव बताता है कि जेडीयू इस बार नए और जमीनी चेहरों के सहारे जनता से जुड़ने की रणनीति अपना रही है.
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महिलाओं की हिस्सेदारी अभी भी सीमित
वहीं दोनों दलों की लिस्ट में महिलाओं को अपेक्षाकृत कम मौका मिला है. जेडीयू ने 57 उम्मीदवारों में सिर्फ 4 महिलाओं को टिकट दिया है, जबकि बीजेपी ने 71 नामों में 9 महिला उम्मीदवार उतारे हैं. बीजेपी ने यहां भी सामाजिक संतुलन बनाए रखा है. इन महिला प्रत्याशियों में कुछ एससी, ओबीसी और ईबीसी वर्गों से हैं.
जातीय समीकरण पर टिकी एनडीए की उम्मीदें
एनडीए के दोनों दलों ने बिहार की सामाजिक संरचना को ध्यान में रखकर टिकटों का बंटवारा किया है. बीजेपी ने सवर्ण और ऊंची जातियों पर फोकस करते हुए अपने परंपरागत वोटरों को साधा है, तो जेडीयू ने लव-कुश और पिछड़े वर्ग के भरोसे मैदान संभाला है. आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में यह सामाजिक संतुलन और जातीय जुगलबंदी एनडीए के लिए जीत का अहम हथियार साबित हो सकता है.