Economic Survey: केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 में बिहार की आर्थिक स्थिति को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार प्रति व्यक्ति वार्षिक आय के मामले में बिहार देश का सबसे गरीब राज्य बनकर उभरा है। 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सूची में बिहार सबसे निचले पायदान पर है। इन आंकड़ों के सामने आते ही राज्य की राजनीति में तीखी बहस शुरू हो गई है।
₹70 हजार से भी कम प्रति व्यक्ति आय
आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक बिहार में प्रति व्यक्ति सालाना औसत आय 70 हजार रुपये से भी कम है। यह आंकड़ा देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे कम है। रिपोर्ट में बताया गया है कि आय के स्तर में यह स्थिति कई वर्षों से बनी हुई है, जिससे राज्य की गरीबी और रोजगार संकट की तस्वीर सामने आती है।
विकास दर ठीक
हालांकि सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि बिहार की आर्थिक विकास दर देश के कई राज्यों से बेहतर रही है, लेकिन पिछले तीन वर्षों की तुलना में इसमें गिरावट दर्ज की गई है। मौजूदा वित्त वर्ष में बिहार की विकास दर पहले के मुकाबले धीमी हुई है, जिसे लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
यह भी देखेंःFormer IAS Arvind Joshi: पूर्व IAS अरविंद जोशी पर शिकंजा, ED ने 5 करोड़ की संपत्ति की जब्ती
RJD का हमला
इन आंकड़ों को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर सीधा हमला बोला है। पार्टी प्रवक्ताओं का कहना है कि दो दशकों से सत्ता में रहने के बावजूद सरकार राज्य को गरीबी से बाहर नहीं निकाल पाई। विपक्ष का आरोप है कि हर बार पिछली सरकारों को जिम्मेदार ठहराकर मौजूदा हालात से बचने की कोशिश की जाती है।
बदहाली से बाहर निकला बिहार
वहीं सत्तारूढ़ जदयू ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि नीतीश कुमार के शासन में बिहार ने कई क्षेत्रों में सुधार किया है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार 2024–25 में बिहार का सकल घरेलू उत्पाद करीब 8 लाख करोड़ रुपये आंका गया है और विकास दर 13 प्रतिशत से अधिक रही है। सरकार का दावा है कि आंकड़ों को समग्र रूप से देखने की जरूरत है, न कि केवल एक पहलू के आधार पर निष्कर्ष निकालने की।