
Bihar Vidhan Sabha: बिहार विधानसभा का मानसून सत्र गुरुवार को भी हंगामेदार रहा. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि अगर राज्य में घुसपैठिए घुसे हैं तो इसके लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी जिम्मेदार हैं. तेजस्वी ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से मुसलमानों और गरीबों के नाम काटने की साजिश हो रही है. उन्होंने दिखाया कि एक फॉर्म में 11 तरह के दस्तावेज मांगे गए हैं, जो आम आदमी के पास नहीं होते. उन्होंने एक पत्रकार का हवाला देते हुए कहा कि कैसे बिना दस्तावेज के फॉर्म अपलोड किए जा रहे हैं. इस पर सत्तापक्ष से सम्राट चौधरी भड़क उठे और तेजस्वी पर निजी हमला कर दिया, जिससे सदन में हंगामा शुरू हो गया और अध्यक्ष को कार्रवाई स्थगित करनी पड़ी.
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से सदन गरमाया
तेजस्वी यादव ने कहा कि सरकार लगातार उनकी योजनाओं की नकल कर रही है, चाहे वह माय-बहन योजना हो या युवाओं से जुड़ी घोषणाएं. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर भी तंज कसा कि दो लाख युवाओं को पकौड़े तलवा दिए गए. दूसरी ओर, मंत्री विजय चौधरी ने विपक्ष के आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि 95 प्रतिशत वोटरों की जांच हो चुकी है. चुनाव आयोग की मंशा पर सवाल उठाना गलत है. उन्होंने दावा किया कि किसी का वोट नहीं कटेगा और सही मतदाता का नाम सूची में बरकरार रहेगा.
AIMIM ने बताया SIR को 'तुगलकी फरमान'
AIMIM विधायक अख्तरुल ईमान ने SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए और कहा कि सीमांचल जिलों में दस्तावेज बनवाना मुश्किल कर दिया गया है. उन्होंने इसे तुगलकी फरमान बताते हुए गरीबों और मुसलमानों को निशाना बनाने का आरोप लगाया. वहीं, बीजेपी और जदयू के विधायक SIR को जरूरी कदम बताकर असली वोटरों की सुरक्षा की बात कह रहे हैं. इस बीच CAG रिपोर्ट और विभिन्न समितियों के प्रतिवेदन सदन में पेश किए गए, लेकिन चर्चा की बजाय ज्यादातर समय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और हंगामे में ही निकल गया.