
बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत लगभग 65 लाख वोटरों के नाम हटाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूरी जानकारी मांगी है. बुधवार को हुई सुनवाई में अदालत ने निर्वाचन आयोग को 9 अगस्त (शनिवार) तक यह विवरण जमा करने का निर्देश दिया है. जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने आयोग से कहा कि हटाए गए मतदाताओं का पूरा विवरण कोर्ट में पेश करें. इस विवरण की एक प्रति गैर-सरकारी संगठन ADR (एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स) को भी दी जाए. कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं तो वह इस पर तत्काल दखल देगा.
ADR ने क्यों उठाई मांग?
ADR ने एक नई अर्जी में कहा था कि निर्वाचन आयोग को यह निर्देश दिया जाए कि जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उनकी सूची सार्वजनिक की जाए. साथ ही हर नाम के साथ यह भी बताया जाए कि वह व्यक्ति मृत है, कहीं और पलायन कर गया है या किसी और कारण से उसका नाम हटाया गया.
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कोर्ट और प्रशांत भूषण के बीच क्या बातचीत हुई?
ADR की ओर से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण पेश हुए. उन्होंने कोर्ट से कहा कि कुछ राजनीतिक दलों को पहले ही सूची दे दी गई है, लेकिन आम लोगों को इसकी जानकारी नहीं है. हटाए गए नामों के बारे में यह नहीं बताया गया कि किन कारणों से उन्हें बाहर किया गया.
इस पर कोर्ट ने कहा "अभी यह ड्राफ्ट यानी मसौदा सूची है, अंतिम सूची नहीं. हर प्रभावित मतदाता से संपर्क किया जाएगा और वजह पूछी जाएगी. आयोग को शनिवार तक जवाब देना होगा."
दस्तावेजों को लेकर आरोप
भूषण ने यह भी दावा किया कि मतदाता लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए जो फॉर्म भरवाए गए, उनमें से 75% लोगों ने कोई वैध दस्तावेज नहीं दिए थे. उनके नाम सिर्फ बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) की सिफारिश पर शामिल किए गए थे.
आगे की सुनवाई कब?
सुप्रीम कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि बिहार में मतदाता सूची से जुड़े विवाद पर 12 और 13 अगस्त को दोबारा सुनवाई होगी. ADR इन तारीखों पर अपने सभी तर्क पेश कर सकता है.
कोर्ट का रुख क्यों सख्त हुआ?
इससे पहले 29 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि "अगर यह पाया गया कि बड़ी संख्या में लोगों के नाम बिना उचित कारण के हटाए गए हैं तो कोर्ट इस पर तुरंत कार्रवाई करेगा." सुप्रीम कोर्ट ने यह भी दोहराया कि निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसे कानून के अनुसार काम करना चाहिए.
बिहार में SIR प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से इसका ब्योरा मांगा है और आगे की सुनवाई में बड़ा फैसला आ सकता है.