
बिहार में इन दिनों मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासत गरमा गई है. इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने संसद के मॉनसून सत्र के दौरान जबरदस्त हंगामा किया. कांग्रेस समेत अन्य दलों ने लोकसभा और राज्यसभा दोनों में इस मुद्दे पर बहस की मांग की, जिसकी वजह से सदनों की कार्यवाही को बार-बार रोकना पड़ा.
किरण रिजिजू ने कहा– संसद में बहस नहीं हो सकती
बुधवार को जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे शुरू हुई, विपक्षी सांसदों ने SIR और बिहार की मतदाता सूची से हटाए गए लाखों नामों को लेकर जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया. इस पर केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि इस मुद्दे पर संसद में चर्चा संभव नहीं है क्योंकि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है.
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रिजिजू ने लोकसभा में कहा कि संसद के नियमों के अनुसार किसी कोर्ट में लंबित मामले पर बहस नहीं हो सकती. चुनाव आयोग जैसी स्वायत्त संस्थाओं के कामकाज पर संसद में चर्चा की अनुमति नहीं है. वहीं विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने पूछा, "क्या आप सदन के नियम तोड़ना चाहते हैं? क्या आप देश के कायदे-कानून खत्म करना चाहते हैं?" रिजिजू ने विपक्ष से सदन चलने देने की अपील भी की, लेकिन नारेबाजी जारी रही, जिसके बाद लोकसभा की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई.
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को 3 दिन का समय दिया
इसी मुद्दे पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने भी बड़ा निर्देश दिया. कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि बिहार में SIR प्रक्रिया के दौरान हटाए गए 65 लाख वोटरों की सूची का विवरण 3 दिन के अंदर सौंपा जाए. यह आदेश एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया. जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्ज्वल भुयान और जस्टिस एन. के. सिंह की बेंच ने साफ कहा कि चुनाव आयोग को शनिवार तक पूरी जानकारी देनी होगी.
क्या है SIR विवाद?
SIR यानी Special Intensive Revision चुनाव आयोग द्वारा की जा रही मतदाता सूची की विशेष जांच प्रक्रिया है. बिहार में इस प्रक्रिया के तहत करीब 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं जिसे लेकर विपक्ष का आरोप है कि यह एकतरफा कार्रवाई है और इसके पीछे राजनीतिक मंशा हो सकती है. अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है और संसद में विपक्ष इसकी पारदर्शिता पर सवाल उठा रहा है. आगे देखना होगा कि अदालत और आयोग की कार्यवाही क्या नतीजा देती है.