बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव सामने आया है, जिसने पूरे राज्य में हलचल मचा दी। माना जा रहा है कि अब बिहार में कानून व्यवस्था ‘योगी मॉडल’ की तर्ज पर चलाई जाएगी। वजह है गृह विभाग का मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से हटकर नए उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को दिया जाना। बिहार के इतिहास में लगभग दो दशक बाद पहली बार हुआ है कि नीतीश कुमार ने गृह विभाग अपने हाथ से छोड़ा है, जिससे सियासी हलकों में चर्चा है कि “अब बिहार में बुलडोज़र चलेगा।” बीजेपी लंबे समय से इस मंत्रालय की मांग कर रही थी और अब मिलने के बाद साफ संकेत हैं कि अपराध पर कड़ा प्रहार देखने को मिल सकता है।
बीजेपी की रणनीति का हिस्सा
गृह विभाग का सम्राट चौधरी को मिलना बीजेपी की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की बुलडोज़र पॉलिसी की सफलता के बाद बीजेपी लगातार बिहार में भी वही मॉडल लागू करने की तैयारी में थी। पार्टी नेताओं का कहना है कि अब अपराधियों पर सख्ती बढ़ेगी, अवैध संपत्तियों पर कार्रवाई होगी और पुलिस प्रशासन को पूरी छूट मिलेगी। सोशल मीडिया पर भी सम्राट चौधरी समर्थकों ने ‘बिहार में आ रहा बुलडोज़र’ ट्रेंड शुरू कर दिया है। कई जिलों में प्रशासन को पहले से अलर्ट मोड पर डाल दिया गया है।
#WATCH Patna, Bihar: Deputy Chief Minister Samrat Choudhary takes charge of the Home Department
— ANI (@ANI) November 22, 2025
He says, "The leadership of the BJP and the guidance of Nitish Kumar gave me the opportunity to work as the Home Minister of Bihar... Nitish Kumar has consistently established good… pic.twitter.com/JoTK9LhV9T
फैसले ने डाली विपक्ष के पेट में मरोड़
इस फैसले ने विपक्ष के पेट में मरोड़ डाल दी है। राजनीतिक चर्चाओं में कहा जा रहा है कि यह कदम नीतीश कुमार की कार्यशैली में बड़ा बदलाव है। 2005 से अब तक उन्होंने गृह विभाग अपने पास रखकर कानून व्यवस्था पर सीधा नियंत्रण बनाए रखा था। इसी के चलते उन्हें सुशासन बाबू की पहचान मिली। लेकिन इस बार बीजेपी ने चुनावी आंकड़ों के दम पर उनकी सरकार में गृह विभाग अपने पास रख लिया। अब सम्राट चौधरी पर बड़ी जिम्मेदारी है कि वे नीतीश के बनाए ढांचे को मजबूत बनाएं, वरना विपक्ष उन्हें घेरने में देर नहीं करेगा।
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गृह विभाग मुख्यमंत्री के पास नहीं !
इतिहास भी इस बदलाव को और खास बनाता है। बिहार के 60 साल के राजनीतिक इतिहास में महज तीसरी बार गृह विभाग मुख्यमंत्री के पास नहीं है। 1967 में महामाया प्रसाद सिह की सरकार में और 1971 में कर्पूरी ठाकुर के दौर में ऐसा हुआ था। अब तीसरी बार यह विभाग किसी और मंत्री के पास गया है। जानकारों का कहना है कि इससे साफ हो जाता है कि बीजेपी सिर्फ गठबंधन में शामिल नहीं, बल्कि सरकार की नीति और कानून व्यवस्था पर सीधा प्रभाव रखना चाहती है। अब सबकी निगाहें सम्राट चौधरी पर हैं क्या बिहार में सच में बुलडोज़र मॉडल लागू होगा, या यह सिर्फ शुरुआत है?