उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि बीजेपी का अगला यूपी अध्यक्ष कौन होगा. लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास पर तीन घंटे चली हाई-प्रोफाइल बैठक के बाद संकेत साफ हैं कि पार्टी अब बड़ा फेरबदल करने जा रही है. सूत्रों के मुताबिक अमित शाह के निर्देश मिलते ही योगी पूरी तरह एक्टिव मोड में आ गए हैं और संघ के साथ हुई बैठक में नए अध्यक्ष का नाम लगभग तय कर लिया गया है. बैठक में सरकार के कामकाज, संगठन की समीक्षा और 2027 की रणनीति पर गहन चर्चा हुई. इसी मीटिंग ने साफ कर दिया कि बीजेपी अब चुनावी मैदान में अपना सबसे बड़ा राजनीतिक ब्रह्मास्त्र उतारने जा रही है.
नया अध्यक्ष ‘चेहरा’ नहीं, 2027 का रणनीतिक कमांडर
केंद्रीय नेतृत्व ने यूपी संगठन को साफ संदेश दे दिया है कि 2027 का चुनाव सिर्फ सरकारी काम पर नहीं, बल्कि समाजिक-सियासी समीकरणों के दम पर जीता जाएगा. इसी वजह से नया अध्यक्ष सिर्फ औपचारिक पद नहीं, बल्कि पूरी चुनावी रणनीति का कमांडर होगा. दिलचस्प बात यह है कि बीजेपी इस बार सपा के PDA मॉडल की काट निकालने के लिए या तो ब्राह्मण चेहरा ला सकती है या फिर महिला नेतृत्व को मौका दे सकती है. पार्टी के संगठन में पहले से ही 45 सवर्ण, 32 ओबीसी और 7 दलित जिला अध्यक्ष मौजूद हैं, यानी पूरा ढांचा एक संतुलित सामाजिक संदेश देने के लिए तैयार है.
ब्राह्मण या महिला अध्यक्ष? सस्पेंस अपनी चरम पर
ब्राह्मण चेहरे की चर्चा सबसे ज्यादा इसलिए गर्म है क्योंकि यूपी की राजनीति में यह वर्ग निर्णायक माना जाता है. 2017 में महेंद्र नाथ पांडेय को अध्यक्ष बनाकर बीजेपी इसका फायदा उठा चुकी है. अब 2027 को ध्यान में रखते हुए बस्ती के पूर्व सांसद हरीश चंद्र द्विवेदी का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है. लेकिन बड़ा ट्विस्ट यह है कि पार्टी महिला अध्यक्ष भी ला सकती है. साध्वी निरंजन ज्योति इस रेस में सबसे मजबूत नाम मानी जा रही हैं वह ओबीसी वर्ग से हैं, हिंदुत्व की प्रबल छवि रखती हैं और महिला नेतृत्व को मजबूत संदेश दे सकती हैं. ओबीसी और दलित वर्ग से कई अन्य नाम भी चर्चा में हैं, जिससे सस्पेंस और बढ़ गया है.
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विपक्ष की बेचैनी बढ़ी, दिल्ली की ओर सबकी नजरें
इस पूरी हलचल ने विपक्ष की टेंशन बढ़ा दी है. योगी, शाह और संघ की तिकड़ी लगातार बैठकें कर रही है और संकेत साफ हैं कि बीजेपी बहुत जल्द बड़ा ऐलान करने वाली है. जानकारों का मानना है कि नया अध्यक्ष आने के साथ ही 2027 मिशन की शुरुआत हो जाएगी और चुनावी हवा बीजेपी के पक्ष में मोड़ने का काम करेगा. विपक्ष को सबसे ज्यादा डर इसी बात का है कि यह फैसला PDA मॉडल की सीधी चुनौती साबित होगा. अब फैसला दिल्ली के कोर्ट में है. आदेश जारी होते ही यूपी की राजनीति में बड़ा भूचाल आना तय है और नया बीजेपी बॉस कौन होगा, इसका खुलासा बस कुछ ही दिनों में हो सकता है.