Bluebird Block-2: के अंतरिक्ष इतिहास में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ने जा रहा है। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से ‘ब्लूबर्ड ब्लॉक-2’ संचार उपग्रह के प्रक्षेपण की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस मिशन के लिए एलवीएम3-एम6 रॉकेट की 24 घंटे की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। इसरो के अनुसार, यह उपग्रह पृथ्वी की निम्न कक्षा में स्थापित किया जाएगा और इसका मकसद दुनिया भर में सीधे मोबाइल फोन तक नेटवर्क पहुंचाना है। यह मिशन भारत की वाणिज्यिक अंतरिक्ष क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर नई पहचान देगा।
सबसे भारी पेलोड, तकनीकी ताकत
ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 का वजन करीब 6,100 किलोग्राम है, जो अब तक एलवीएम3 रॉकेट से लॉन्च होने वाला सबसे भारी पेलोड माना जा रहा है। यह तीन चरणों वाला शक्तिशाली प्रक्षेपण यान क्रायोजेनिक इंजन से लैस है और इसमें अतिरिक्त थ्रस्ट के लिए दो ठोस रॉकेट बूस्टर लगाए गए हैं। प्रक्षेपण के लगभग 15 मिनट बाद उपग्रह के रॉकेट से अलग होकर अपनी निर्धारित कक्षा में पहुंचने की उम्मीद है। यह मिशन न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड और अमेरिका की एएसटी स्पेसमोबाइल के बीच हुए समझौते के तहत संचालित किया जा रहा है।
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सीधे मोबाइल नेटवर्क, दूरदराज तक पहुंच
ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 मिशन का मुख्य उद्देश्य उपग्रह के जरिए सीधे स्मार्टफोन को 4जी और 5जी सेवाएं उपलब्ध कराना है। इसके जरिए वॉयस और वीडियो कॉल, संदेश, स्ट्रीमिंग और हाई-स्पीड डेटा सेवाएं बिना पारंपरिक टावरों के संभव होंगी। इससे पहाड़ी इलाकों, रेगिस्तानों और दूरस्थ क्षेत्रों में भी मोबाइल कनेक्टिविटी आसानी से पहुंच सकेगी। एएसटी स्पेसमोबाइल पहले ही इस तरह के उपग्रहों का एक नेटवर्क विकसित कर चुकी है और भविष्य में इसे और मजबूत करने की योजना है। माना जा रहा है कि यह तकनीक मोबाइल संचार की दुनिया में बड़ा बदलाव लेकर आएगी और डिजिटल कनेक्टिविटी को सचमुच वैश्विक बना देगी।