BRICS Delhi Declaration : नई दिल्ली में चल रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक सफलता की खबर सामने आई है। सूत्रों के अनुसार सदस्य देशों के बीच दुनिया में कहीं भी होने वाली एकतरफा सैन्य कार्रवाई और आक्रामकता के खिलाफ साझा सहमति बन गई है। बताया जा रहा है कि आज शाम 4 बजे जारी होने वाले नई दिल्ली घोषणापत्र में इस सहमति को औपचारिक रूप दिया जाएगा। इस घटनाक्रम को भारत की सक्रिय कूटनीति का महत्वपूर्ण परिणाम माना जा रहा है।
घोषणापत्र में क्या होगा खास
जानकारी के मुताबिक साझा बयान में किसी विशेष देश का नाम नहीं लिया जाएगा, लेकिन हर प्रकार की आक्रामकता की निंदा की जाएगी। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच यह संदेश काफी अहम माना जा रहा है। घोषणापत्र में इस बात पर भी जोर दिए जाने की संभावना है कि अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान युद्ध नहीं बल्कि संवाद और कूटनीति के जरिए होना चाहिए। यही वजह है कि इस दस्तावेज पर दुनिया की नजर बनी हुई है।
आसान नहीं थी आम सहमति
ब्रिक्स जैसे मंच पर साझा बयान तैयार करना हमेशा चुनौतीपूर्ण माना जाता है। सदस्य देशों के अपने-अपने रणनीतिक हित और वैश्विक मुद्दों पर अलग-अलग दृष्टिकोण होते हैं। सूत्रों के अनुसार सम्मेलन से पहले कई दिनों तक ब्रिक्स शेरपाओं और कूटनीतिक अधिकारियों ने लगातार बातचीत की। विशेष रूप से पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर भाषा और शब्दों पर मतभेद थे, जिन्हें दूर करने के लिए लंबी चर्चा करनी पड़ी।
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भारत की कूटनीतिक परीक्षा
सभी सदस्य देशों को एक संयुक्त घोषणा पर सहमत करना भारत के लिए बड़ी परीक्षा थी। मेजबान देश होने के नाते भारत पर यह जिम्मेदारी थी कि वह अलग-अलग विचार रखने वाले देशों को एक मंच पर लाए। अब यदि साझा घोषणापत्र जारी होता है तो इसे भारतीय कूटनीति और वार्ता कौशल की बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जाएगा। इससे भारत की वैश्विक मंचों पर मध्यस्थ और संवाद समर्थक छवि को भी मजबूती मिलेगी।
पहले नहीं बन पाई थी सहमति
इस घटनाक्रम की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि कुछ समय पहले दिल्ली में हुई ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में साझा बयान जारी नहीं हो सका था। उस बैठक में विभिन्न मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई थी। ऐसे में शिखर सम्मेलन के दौरान नेताओं के स्तर पर एकमत होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे यह संकेत भी मिलता है कि सदस्य देश कई संवेदनशील मुद्दों पर एक साझा रुख अपनाने के लिए तैयार हुए हैं।
युद्ध नहीं, संवाद पर जोर
सूत्रों के अनुसार नई दिल्ली घोषणापत्र का मुख्य संदेश यह होगा कि दुनिया में बढ़ते संघर्षों को रोकने के लिए बातचीत ही सबसे प्रभावी रास्ता है। चाहे पश्चिम एशिया का संकट हो या अन्य क्षेत्रीय तनाव, ब्रिक्स देशों की सोच युद्ध के बजाय समाधान खोजने पर केंद्रित दिखाई दे रही है। ऐसे समय में जब कई हिस्सों में संघर्ष जारी हैं, यह साझा संदेश वैश्विक राजनीति में एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा सकता है