BRICS Summit: नई दिल्ली में हुए दो दिवसीय BRICS सम्मेलन के सफल समापन के बाद भारत की कूटनीति को लेकर विशेषज्ञों की राय सामने आने लगी है। सम्मेलन में अलग-अलग देशों के बीच मौजूद मतभेदों और जियोपॉलिटिकल तनाव के बावजूद नई दिल्ली डिक्लेरेशन पर सहमति बनना भारत के लिए अहम उपलब्धि माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत ने BRICS के बढ़ते दायरे और विविधता को चुनौती के बजाय सहयोग के अवसर में बदलने की कोशिश की।
भारतीय कूटनीति की जमकर तारीफ
ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के जिंदल स्कूल ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स के डीन प्रोफेसर श्रीराम चौलिया ने सम्मेलन के नतीजे को भारतीय कूटनीति के लिए शानदार सफलता बताया। उनके मुताबिक, BRICS के सदस्य देशों के बीच कई मुद्दों पर अलग-अलग राय है, लेकिन भारत ने सभी देशों को एक साझा न्यूनतम सहमति के आधार पर साथ लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि यह भारत की बहुपक्षीय कूटनीति और अलग-अलग मतों को संभालने की क्षमता को दिखाता है।
मतभेदों को ताकत में बदलने की कोशिश
विशेषज्ञों के मुताबिक, BRICS के विस्तार के साथ सदस्य देशों के बीच मतभेद बढ़ने की आशंका थी। इसके बावजूद भारत ने समूह की विविधता को सहयोग के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की। चौलिया ने कहा कि युद्ध, जियोपॉलिटिकल तनाव और अन्य विवादित मुद्दों के बीच भी साझा एजेंडे पर आगे बढ़ना संभव हुआ। उनके मुताबिक, नई दिल्ली डिक्लेरेशन इस बात का उदाहरण है कि बंटी हुई दुनिया में भी सहयोग के रास्ते तलाशे जा सकते हैं।
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आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून पर चर्चा
यूरोपियन प्रेस फेडरेशन के पत्रकार मार्को एल्पेगियानी ने घोषणापत्र में आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून से जुड़े मुद्दों को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट रुख जरूरी है और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने पर जोर दिया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, BRICS की चर्चा में आतंकवाद की व्यापक चुनौती और उससे निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत भी सामने आई।
डिक्लेरेशन को लागू करना अगली चुनौती
दक्षिण अफ्रीका के पत्रकार सियाबोंगा गुडमैन माडोंडो ने कहा कि BRICS देशों के लिए नई दिल्ली डिक्लेरेशन पर सहमति बनाना जरूरी था। उनके मुताबिक, दस्तावेज में युद्ध, मध्य पूर्व की स्थिति, मानव तस्करी, आर्थिक विकास और वैश्विक स्थिरता जैसे कई मुद्दे शामिल हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि केवल घोषणापत्र जारी करना पर्याप्त नहीं है। अब इसमें शामिल बातों को जमीन पर लागू करने के लिए सदस्य देशों को आगे मिलकर काम करना होगा। इससे पहले अमेरिकी दक्षिण एशिया विश्लेषक माइकल कुगेलमैन भी नई दिल्ली डिक्लेरेशन को भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक सफलता बता चुके हैं।