BRICS Economic Crime : भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले 18वें ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। इस बार सम्मेलन का एक बड़ा केंद्र आर्थिक अपराधियों पर कार्रवाई को और प्रभावी बनाना होगा। ऐसे लोग जो देश का पैसा लेकर विदेश भाग जाते हैं, उन्हें वापस लाने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए भारत सदस्य देशों के सामने नया प्रस्ताव रखने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि यह पहल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
क्यों जरूरी है नया ढांचा?
वर्तमान व्यवस्था में किसी आर्थिक अपराधी का पता लगाना, उसकी संपत्तियों की जानकारी जुटाना और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पूरी करना काफी लंबा और जटिल काम होता है। अलग-अलग देशों के कानून और कानूनी प्रक्रियाएं जांच को धीमा कर देती हैं। इसी कारण कई मामलों में आरोपी लंबे समय तक कानूनी खामियों का लाभ उठाते रहते हैं। भारत चाहता है कि सदस्य देशों के बीच जानकारी साझा करने की प्रक्रिया अधिक तेज और व्यवस्थित हो।
क्या होगा नए प्रस्ताव में?
प्रस्तावित ढांचे के तहत शुरुआती जांच के दौरान ही देशों के बीच खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जा सकेगा। इसके लिए एक तय प्रारूप में जरूरी जानकारी साझा करने का सुझाव दिया गया है। साथ ही संपत्तियों की पहचान, उन्हें जब्त करने और पीड़ित पक्ष को नुकसान की भरपाई दिलाने से जुड़े नियमों को भी मजबूत बनाने की योजना है। तकनीकी सहयोग और कानूनी समन्वय को भी इस व्यवस्था का अहम हिस्सा बनाया जाएगा।
ये भी पढ़ें : Satya Niketan हादसे पर Supreme Court सख्त, जस्टिस बोले- 'हमारे दिमाग में कुछ है', 10 सितंबर को होगी अहम सुनवाई
भगोड़ों पर कैसे पड़ेगा असर?
भारत का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने पर ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों को शुरुआत से ही एक-दूसरे के साथ काम करने का अवसर मिलेगा। इससे आर्थिक अपराधियों की लोकेशन पता करने, उनकी संपत्तियों का रिकॉर्ड जुटाने और कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाने में समय कम लगेगा। अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत होने से सीमा पार छिपे अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई ज्यादा प्रभावी बन सकेगी।
नीरव मोदी जैसे मामलों से सबक
पिछले कुछ वर्षों में भारत कई बड़े आर्थिक अपराध मामलों में आरोपियों को वापस लाने की कोशिश करता रहा है। नीरव मोदी और मेहुल चोकसी जैसे मामलों ने यह दिखाया कि लंबी कानूनी प्रक्रिया जांच एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। इसी अनुभव के आधार पर भारत ऐसा तंत्र विकसित करना चाहता है जिसमें देशों के बीच सहयोग पहले चरण से ही शुरू हो जाए और कार्रवाई में अनावश्यक देरी न हो।
डिजिटल संपत्तियों पर भी नजर
आज के समय में आर्थिक अपराधों में क्रिप्टो और अन्य डिजिटल संपत्तियों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इन्हें ट्रैक करना और जरूरत पड़ने पर फ्रीज करना जांच एजेंसियों के लिए कठिन चुनौती बन गया है। प्रस्तावित ढांचा इस पहलू को भी ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसी दिशा में ब्रिक्स सम्मेलन से पहले गांधीनगर में विशेषज्ञों और जांच एजेंसियों के अधिकारियों का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किया जा रहा है, ताकि वित्तीय अपराधों से निपटने की क्षमता और बेहतर हो सके।