Satya Niketan Collapse : दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने से हुए दर्दनाक हादसे का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी से जुड़े एक पुराने मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता और न्यायालय मित्र अजित कुमार सिन्हा ने इस हादसे का मुद्दा उठाया। उन्होंने अदालत को बताया कि सत्य निकेतन में हुई घटना में कई लोगों की जान गई है और यह मामला गंभीर चिंता का विषय है।
अदालत ने दिखाई गंभीरता
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि यह सिर्फ एक शहर की समस्या नहीं है। अदालत ने संकेत दिया कि अवैध निर्माण और सुरक्षा नियमों की अनदेखी के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर देखने की जरूरत है। कोर्ट ने कहा कि वह 10 सितंबर को इस मामले पर विस्तार से सुनवाई करेगा।
सॉलिसिटर जनरल ने जताया दुख
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हादसे को बेहद दुखद बताया। उन्होंने कहा कि इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है और मृतकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा पारित आदेशों की जानकारी भी सुप्रीम कोर्ट को दी और बताया कि मामले में कार्रवाई शुरू हो चुकी है।
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हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के मामलों में समानता
सुनवाई के दौरान जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट में चल रहा मामला और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित याचिका कई मामलों में एक जैसी है। अदालत ने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर हाई कोर्ट में लंबित मामले को सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित किया जा सकता है, ताकि पूरे देश के संदर्भ में एक व्यापक समाधान तलाशा जा सके।
पहले भी उठा चुका है कोर्ट सवाल
इससे पहले जुलाई में हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर और लखनऊ में अवैध निर्माण तथा अग्नि सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर चिंता जताई थी। अदालत ने जिम्मेदार अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय करने की बात कही थी। साथ ही स्थिति का मूल्यांकन करने के लिए विशेषज्ञों की एक विशेष निरीक्षण टीम गठित करने का निर्देश भी दिया गया था।
क्या हुआ था सत्य निकेतन में?
रविवार दोपहर सत्य निकेतन इलाके में लड़कों के पीजी के रूप में इस्तेमाल हो रही एक बहुमंजिला इमारत अचानक ढह गई थी। मलबे से 12 लोगों को निकाला गया, जिनमें 7 लोगों की मौत हो गई। मामले में इमारत के मालिक परिवार को गिरफ्तार किया गया है। वहीं नगर निगम ने भी कार्रवाई करते हुए दक्षिण जोन के उपायुक्त समेत पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। अब सबकी नजर 10 सितंबर की सुप्रीम कोर्ट सुनवाई पर टिकी है, जहां इस पूरे मुद्दे पर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश सामने आ सकते हैं।