उत्तर प्रदेश की सियासत में चल रही जुबानी जंग उस वक्त और गंभीर हो गई, जब बृजभूषण शरण सिंह ने धनंजय सिंह और अभय सिंह के विवाद में खुलकर दखल दे दिया। गोंडा के विष्णोहरपुर से आए उनके बयान ने साफ कर दिया कि मामला अब सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा। बृजभूषण ने दोनों नेताओं को सीधी नसीहत देते हुए कहा कि यह बेकार की लड़ाई है और इससे किसी का भला नहीं होने वाला। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई।
सोशल मीडिया की लड़ाई पर ब्रेक
बृजभूषण शरण सिंह ने धनंजय सिंह और अभय सिंह के बीच चल रहे सोशल मीडिया हमलों को गैर जरूरी बताया। उन्होंने साफ कहा कि न अब अस्सी का दौर है और न नब्बे का जमाना। न कोई गैंग बची है और न ही गैंगवार का वक्त। उनका कहना था कि आज की राजनीति बदल चुकी है और ताकत दिखाने की पुरानी सोच अब काम नहीं आने वाली। यह बयान सीधे उन समर्थकों को चुभा, जो इस विवाद को बड़ा टकराव मानकर देख रहे थे।
कौन बड़ा कौन छोटा फैसला वक्त करेगा
बृजभूषण ने दोनों नेताओं और उनके समर्थकों को आईना दिखाते हुए कहा कि कौन बड़ा है और कौन छोटा, इसका फैसला न आज होगा और न सोशल मीडिया पर। आने वाला वक्त ही इसका जवाब देगा। उन्होंने यह भी कहा कि भगवान ने मौका दिया है तो जनता के बीच जाकर काम करना चाहिए, न कि यह साबित करने में लगे रहना चाहिए कि किसके पास ज्यादा ताकत है। यह संदेश साफ था कि राजनीति में जिम्मेदारी ज्यादा जरूरी है, न कि बयानबाजी।
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लखनऊ तक पहुंची चर्चा
बृजभूषण शरण सिंह के बयान के बाद धनंजय और अभय दोनों के समर्थकों में बेचैनी साफ देखी जा रही है। जिस जुबानी जंग को अब तक दो नेताओं की लड़ाई माना जा रहा था, उसमें अब एक अनुभवी और प्रभावशाली नेता की एंट्री हो चुकी है। खास बात यह है कि यह विवाद कफ सिरप मामले के बीच चल रहा है, जिस पर पहले से ही माहौल गरम है। ऐसे में बृजभूषण का बीच में आना कई मायनों में अहम माना जा रहा है। अब सवाल यही है कि क्या दोनों नेता उनकी बात मानेंगे या फिर यह सियासी घमासान और तेज होगा। फिलहाल इतना तय है कि गोंडा से निकली यह नसीहत लखनऊ तक गूंज रही है और पूरे प्रदेश की नजर आगे के घटनाक्रम पर टिकी हुई है।