कुछ ही दिनों में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट 2026 पेश करेंगी और इस बार उम्मीदें भी बड़ी हैं। देश के सामने सिर्फ घरेलू चुनौतियां नहीं हैं बल्कि वैश्विक व्यापार, युद्ध के असर और बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरण भी हैं। ऐसे माहौल में बजट से यह उम्मीद की जा रही है कि वह अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने के साथ आगे बढ़ाने की दिशा भी तय करेगा।
सरकारी खर्च में बड़ी बढ़ोतरी की उम्मीद
निवेश सलाहकार कंपनी के मुख्य निवेश अधिकारी जसप्रीत सिंह अरोरा का मानना है कि इस बार बजट में सरकारी खर्च 11 से 13 फीसदी तक बढ़ सकता है। उनका कहना है कि सरकार बुनियादी ढांचे और नई तकनीक पर ज्यादा खर्च कर सकती है। इससे रोजगार के मौके बढ़ेंगे और अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलेगी।
नई तकनीक और उद्योग पर फोकस
बजट 2026 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को खास बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सरकार स्थानीय उत्पादन को मजबूत करना चाहती है ताकि आयात पर निर्भरता कम हो। इसके लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव जैसी योजनाओं को और मजबूत किया जा सकता है।
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वैश्विक हालात ने बढ़ाई चिंता
दुनिया भर में व्यापार से जुड़े फैसले और टैरिफ नीतियां बाजार को प्रभावित कर रही हैं। हाल के महीनों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ी है। रुपए की कमजोरी से आयात महंगा हुआ है और कंपनियों पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में बजट से उम्मीद है कि वह बाजार को भरोसा देने वाले कदम उठाएगा।
रिफॉर्म और संतुलन पर जोर
जानकारों का कहना है कि यह बजट सुधारों पर आधारित हो सकता है लेकिन तय सीमा में रहकर। सरकार राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखते हुए पूंजीगत खर्च बढ़ा सकती है। नियमों में ढील, कारोबार को आसान बनाना और सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी घटाने जैसे कदमों पर भी जोर दिया जा सकता है।
रिज़र्व बैंक की क्या होगी भूमिका
बजट के साथ-साथ रिज़र्व बैंक की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। अनुमान है कि ब्याज दरों में बड़ी कटौती की बजाय नकदी की उपलब्धता बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। बाजार में पैसे की कमी दूर करने के लिए अलग-अलग उपाय किए जा सकते हैं। कुल मिलाकर बजट और रिज़र्व बैंक मिलकर अर्थव्यवस्था को संभालने की कोशिश करेंगे और यही वजह है कि इस बजट पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं।