भारत तेजी से डिजिटल दुनिया का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, यूपीआई, ऑनलाइन स्ट्रीमिंग और क्लाउड सेवाओं की बढ़ती जरूरत के चलते डेटा सेंटर्स की मांग लगातार बढ़ रही है। अनुमान है कि 2035 तक भारत में डेटा सेंटर्स की क्षमता करीब 14 गीगावॉट तक पहुंच सकती है। इसी वजह से भारत को एक बड़े और भरोसेमंद डेटा सेंटर हब के तौर पर देखा जा रहा है।
बजट 2026 से बड़ी उम्मीदें
बजट 2026 को लेकर डेटा सेंटर इंडस्ट्री को काफी उम्मीदें हैं। माना जा रहा है कि सरकार सस्ती जमीन, टैक्स में छूट और बिजली दरों में राहत देकर बड़े हाइपरस्केल डेटा सेंटर्स को आकर्षित कर सकती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक 2035 तक इस सेक्टर में करीब 70 अरब डॉलर का निवेश आ सकता है। इससे रोजगार बढ़ेगा और भारत की डिजिटल ताकत और मजबूत होगी।
AI ने बढ़ाई बिजली और पानी की चिंता
डेटा सेंटर्स जितने जरूरी हैं, उतने ही ज्यादा संसाधन भी खपत करते हैं। AI चैटबॉट, जनरेटिव AI और वीडियो प्लेटफॉर्म की वजह से डेटा प्रोसेसिंग बढ़ी है। अभी भारत में डेटा सेंटर्स की करीब 15 से 20 प्रतिशत क्षमता AI के लिए इस्तेमाल हो रही है, जो 2030 तक 40 से 50 प्रतिशत तक जा सकती है। इसका सीधा असर बिजली की खपत, गर्मी और कूलिंग सिस्टम पर पड़ता है।
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पानी और बिजली सबसे बड़ी चुनौती
एक मेगावॉट का डेटा सेंटर रोजाना करीब 68 हजार लीटर पानी सिर्फ कूलिंग के लिए इस्तेमाल कर सकता है। मुंबई और दिल्ली जैसे शहरों में पहले ही पानी की कमी है। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अभी से सस्टेनेबल प्लानिंग नहीं की गई, तो आगे चलकर बड़ी दिक्कत खड़ी हो सकती है। इसलिए सरकार से मांग की जा रही है कि आधुनिक कूलिंग टेक्नोलॉजी और पानी बचाने वाले सिस्टम को बढ़ावा दिया जाए।
इंडस्ट्री क्या चाहती है सरकार से
डेटा सेंटर इंडस्ट्री चाहती है कि इन्हें क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा मिले। साथ ही रिन्यूएबल एनर्जी के इस्तेमाल पर ज्यादा इंसेंटिव, ग्रीन डेटा सेंटर्स के लिए कस्टम ड्यूटी में छूट और बिजली ट्रांसमिशन चार्ज में राहत दी जाए। इसके अलावा ग्रीन बॉन्ड्स के जरिए सस्ती फंडिंग और पानी-बिजली के इस्तेमाल की पारदर्शी रिपोर्टिंग की मांग भी उठ रही है।
आगे की राह क्या होगी
एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत अभी इस सेक्टर में शुरुआती दौर में है, इसलिए शुरुआत से ही ग्रीन और सस्टेनेबल डेटा सेंटर्स बनाए जा सकते हैं। अगर सरकार सोलर, विंड और बैटरी स्टोरेज को मिलाकर हाइब्रिड एनर्जी मॉडल अपनाती है, तो डेटा सेंटर्स को 24 घंटे साफ ऊर्जा मिल सकती है। अब सबकी नजरें बजट 2026 पर हैं, जहां यह तय होगा कि भारत डिजिटल हब बनते हुए पर्यावरण संतुलन कैसे बनाए रखेगा।