अगर आपने नया घर खरीदा है और कुछ ही समय में छत से पानी टपकने लगे या दीवारों का प्लास्टर उखड़ने लगे, तो यह गंभीर मामला है। रियल एस्टेट नियमन और विकास अधिनियम 2016 के तहत यह ‘स्ट्रक्चरल डिफेक्ट’ माना जाता है। कानून साफ कहता है कि कब्जा मिलने के 5 साल के भीतर ऐसी कोई भी समस्या सामने आती है, तो बिल्डर को 30 दिनों के अंदर इसे मुफ्त में ठीक करना होगा।
बिल्डर की जिम्मेदारी और आपकी ताकत
कानून के अनुसार बिल्डर का कर्तव्य है कि वह खराब कारीगरी, निर्माण की कमी या किसी भी तकनीकी खामी को बिना शुल्क लिए ठीक करे। अगर वह ऐसा नहीं करता, तो होमबायर मुआवजे का हकदार होता है। रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण यानी RERA ऐसे मामलों में खरीदारों को मजबूत कानूनी सुरक्षा देता है।
शिकायत कैसे और कहां करें
सबसे पहले बिल्डर को लिखित में शिकायत दें और 30 दिन का समय दें। अगर इसके बाद भी समस्या हल नहीं होती, तो सीधे RERA में शिकायत दर्ज कर सकते हैं। हर राज्य में RERA का पोर्टल होता है, जहां ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। यहां आपकी शिकायत पर सुनवाई होती है और बिल्डर को जवाब देना पड़ता है।
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क्या होता है स्ट्रक्चरल डिफेक्ट
स्ट्रक्चरल डिफेक्ट में इमारत की नींव, बीम, कॉलम, स्लैब जैसी मुख्य संरचना से जुड़ी समस्याएं शामिल होती हैं। इसके अलावा घटिया कंस्ट्रक्शन, रिसाव, दीवारों का कमजोर होना या खराब सर्विस भी इसमें आती है। ऐसी समस्याएं अगर 5 साल के भीतर सामने आती हैं, तो बिल्डर की जिम्मेदारी तय होती है।
घर लेने से पहले क्या रखें ध्यान
घर का कब्जा लेने से पहले सभी जरूरी दस्तावेज जरूर जांचें। ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट, बिल्डिंग प्लान और आर्किटेक्ट से जुड़ी फाइलें सही होनी चाहिए। इससे भविष्य में किसी विवाद की संभावना कम हो जाती है। महंगे घर में खामियां मिलने पर चुप बैठना नुकसानदायक हो सकता है। सही जानकारी और कानून की मदद से आप अपना हक आसानी से पा सकते हैं।