अक्सर माता-पिता अपनी जमीन-जायदाद बच्चों के नाम इस उम्मीद से कर देते हैं कि बुढ़ापे में उन्हें सहारा मिलेगा। उन्हें लगता है कि संपत्ति मिलने के बाद बच्चे उनकी अच्छी तरह देखभाल करेंगे। लेकिन कई मामलों में ऐसा नहीं होता। संपत्ति अपने नाम करवाने के बाद कुछ बच्चे माता-पिता की जिम्मेदारी से दूर हो जाते हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या माता-पिता अपनी दी हुई संपत्ति वापस ले सकते हैं?
क्या वापस मिल सकती है जमीन?
इस सवाल का जवाब है हां। अगर किसी बुजुर्ग ने अपनी जमीन या संपत्ति इस भरोसे पर किसी को दी थी कि उसकी देखभाल की जाएगी और बाद में ऐसा नहीं हुआ, तो वह कानूनी मदद लेकर संपत्ति वापस मांग सकता है। कानून ऐसे मामलों में वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षा देता है। इसलिए संपत्ति एक बार नाम हो जाने के बाद भी कुछ परिस्थितियों में वापस हासिल की जा सकती है।
कानून क्या अधिकार देता है?
सीनियर सिटिजन्स मेंटेनेंस एंड वेलफेयर एक्ट 2007 के तहत बुजुर्गों को खास अधिकार दिए गए हैं। इस कानून के अनुसार अगर कोई व्यक्ति संपत्ति लेने के बाद माता-पिता या वरिष्ठ नागरिक की देखभाल नहीं करता, तो संपत्ति हस्तांतरण को रद्द किया जा सकता है। इसके लिए बुजुर्ग संबंधित ट्रिब्यूनल या अधिकारी के पास शिकायत दर्ज करा सकते हैं। जांच के बाद अधिकारियों को संपत्ति वापस करने का अधिकार भी होता है।
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लातूर का मामला क्यों बना चर्चा का विषय?
हाल ही में महाराष्ट्र के लातूर जिले का एक मामला काफी चर्चा में रहा। यहां 90 साल की हौसाबाई लहाड़े ने अपने पोते और परपोते के नाम करीब साढ़े आठ एकड़ जमीन कर दी थी। उनका आरोप था कि जमीन मिलने के बाद परिवार ने उनकी देखभाल करना बंद कर दिया। इसके बाद उन्होंने कानूनी लड़ाई शुरू की। करीब साढ़े तीन साल तक मामला चलने के बाद अधिकारियों ने गिफ्ट डीड रद्द कर दी और जमीन वापस बुजुर्ग महिला को लौटाने का आदेश दिया।
शिकायत कहां की जा सकती है?
अगर किसी वरिष्ठ नागरिक के साथ ऐसा होता है तो वह जिला स्तर पर बने मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल में शिकायत कर सकता है। वहां मामले की सुनवाई होती है और दोनों पक्षों की बात सुनी जाती है। यदि यह साबित हो जाता है कि संपत्ति लेने वाले व्यक्ति ने देखभाल की जिम्मेदारी नहीं निभाई, तो ट्रिब्यूनल संपत्ति वापस दिलाने का आदेश दे सकता है।
संपत्ति देने से पहले रखें सावधानी
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बुजुर्ग को संपत्ति हस्तांतरण से पहले कानूनी सलाह जरूर लेनी चाहिए। दस्तावेजों में साफ तौर पर यह लिखवाना चाहिए कि संपत्ति लेने वाला व्यक्ति देखभाल और भरण-पोषण की जिम्मेदारी निभाएगा। इससे भविष्य में विवाद होने पर कानूनी मदद लेना आसान हो जाता है। सही दस्तावेज और स्पष्ट शर्तें बुजुर्गों के अधिकारों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाती हैं।