आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से जुड़े कथित 24.81 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड का मामला सामने आया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की एंटी करप्शन ब्रांच ने ओमकारा विजयालक्ष्मी स्ट्रिप्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके चार निदेशकों समेत कई अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। मामले में अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और निजी लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। आरोपियों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, विश्वासघात, जालसाजी और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप लगाए गए हैं।
24.98 करोड़ की क्रेडिट सुविधा लेने का आरोप
FIR के मुताबिक कंपनी ने वर्ष 2024 में यूनियन बैंक से करीब 24.98 करोड़ रुपये की क्रेडिट सुविधा हासिल की थी। आरोप है कि बैंक से वित्तीय सुविधा लेने के लिए कंपनी की ओर से गलत या फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। साथ ही स्टॉक और बुक डेट्स की रकम वास्तविकता से अधिक दिखाए जाने का भी आरोप है। बाद में बैंक के निरीक्षण में घोषित स्टॉक और मौके पर मौजूद वास्तविक स्टॉक में बड़ा अंतर सामने आया।
स्टॉक में भारी अंतर मिलने से बढ़ा संदेह
बैंक की रिपोर्ट के अनुसार 28 मई 2025 को कंपनी ने करीब 23.86 करोड़ रुपये का स्टॉक बताया था। लेकिन 27 जून 2025 को हुए निरीक्षण के दौरान वास्तविक स्टॉक की कीमत लगभग 25 लाख रुपये ही पाई गई। बैंक के मुताबिक बुक डेट्स के समर्थन में जरूरी दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराए गए। इसके बाद बैंक को वित्तीय लेनदेन में अनियमितताओं का संदेह हुआ और मामले की जांच शुरू की गई।
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कई संस्थाओं के जरिए रकम डायवर्ट करने का आरोप
जांच में मारुति ट्रेडर्स और श्री दुर्गा भवानी स्टील्स समेत कुछ संस्थाओं के साथ संदिग्ध लेनदेन की जानकारी सामने आने का दावा किया गया है। आरोप है कि इन संस्थाओं के माध्यम से कारोबार और टर्नओवर को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया और बैंक से मिली रकम को अलग-अलग खातों या संस्थाओं के जरिए डायवर्ट किया गया। FIR में कंपनी के दो निदेशकों के लोन स्वीकृत होने के करीब छह महीने के भीतर इस्तीफा देने का भी उल्लेख किया गया है।
NPA के बाद फ्रॉड के रूप में वर्गीकृत हुआ खाता
बैंक के अनुसार कंपनी का खाता 23 जून 2025 को NPA घोषित किया गया था। उस समय कंपनी पर करीब 26.05 करोड़ रुपये की देनदारी बकाया थी। इसके बाद बैंक के फ्रॉड मैनेजमेंट ग्रुप ने मामले की जांच कर खाते को फ्रॉड के रूप में वर्गीकृत किया। बैंक ने 1 जून 2026 को करीब 24.81 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी की जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को दी। अब CBI मामले में बैंक के सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग और रकम के लेनदेन की जांच कर रही है।