Cash payments or UPI: दिल्ली और बेंगलुरु समेत कई शहरों में व्यापारी अब UPI से पेमेंट लेने में हिचकिचा रहे हैं. वजह है जीएसटी विभाग की सख्ती. कर्नाटक जीएसटी विभाग ने हाल ही में उन व्यापारियों को नोटिस भेजे हैं जो डिजिटल पेमेंट के जरिए कारोबार कर रहे थे, लेकिन उनका टर्नओवर तय सीमा से ज्यादा था और उन्होंने जीएसटी रजिस्ट्रेशन नहीं कराया था. इस डर से कई दुकानदार अब केवल कैश ले रहे हैं, लेकिन राहत यहां भी नहीं है।.
कैश लेनदेन पर भी लागू होंगे GST के नियम
17 जुलाई को जारी बयान में जीएसटी विभाग ने स्पष्ट किया कि टैक्स का नियम पेमेंट के तरीके पर नहीं बल्कि कारोबार की सीमा पर निर्भर करता है. चाहे ग्राहक पेमेंट कैश में करे या UPI, यदि सालाना टर्नओवर सीमा से अधिक है, तो व्यापारी को जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराना ही होगा. सिर्फ कैश लेने से नियमों से बचा नहीं जा सकता. ऐसे में सिर्फ माध्यम बदलने से राहत नहीं मिलने वाली, नियमों का पालन हर हाल में करना पड़ेगा.
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कब जरूरी है GST रजिस्ट्रेशन?
वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 के तहत अगर कोई व्यापारी केवल वस्तुएं बेचता है और उसका सालाना टर्नओवर 40 लाख रुपये से अधिक है, तो उसे जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है. वहीं सेवाएं देने वाले कारोबारियों के लिए यह सीमा 20 लाख रुपये है. हालांकि जिनका सालाना टर्नओवर 1.5 करोड़ रुपये से कम है, वे कंपोजिशन स्कीम चुन सकते हैं और कम टैक्स दरों के तहत भुगतान कर सकते हैं.