CBI Registers FIR: दिल्ली के AIIMS में मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर भर्ती और इलाज दिलाने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय यानी PMO का अधिकारी बनकर प्रभाव डालने का मामला सामने आया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने दक्षिण दिल्ली के संगम विहार निवासी रवि कांत शर्मा के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि उसने खुद को प्रधानमंत्री के OSD के तौर पर पेश किया और AIIMS अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए फर्जी पहचान और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किया। CBI की SC-1 यूनिट ने 31 अगस्त 2026 को यह मामला दर्ज किया।
WhatsApp पर खुद को बताया PMO अधिकारी
FIR के मुताबिक, 26 फरवरी को रवि कांत शर्मा ने WhatsApp के जरिए AIIMS के प्रोटोकॉल अधिकारी बीएन आचार्य से संपर्क किया था। इस दौरान उसने खुद को प्रधानमंत्री का OSD बताया। अधिकारियों पर प्रभाव डालने के लिए आरोपी ने PMO पोर्टल से संबंधित एक ईमेल पता भी साझा किया। आरोप है कि इस पहचान के आधार पर उसने AIIMS में एक मरीज को प्राथमिकता से भर्ती कराने और इलाज दिलाने के लिए हस्तक्षेप करने की कोशिश की।
तीन मरीजों के मामलों में दखल का आरोप
जांच में यह बात भी सामने आई कि आरोपी ने सिर्फ एक मरीज के मामले में ही हस्तक्षेप नहीं किया था। CBI के अनुसार, मुजफ्फरनगर निवासी मोहम्मद इमरान के अलावा कविता और अर्चना नाम की दो अन्य मरीजों के मामलों में भी इसी तरह प्रभाव डालने की कोशिश की गई। AIIMS की ओर से शुरुआती तौर पर इस आधार पर विशेष प्राथमिकता दिए जाने की बात सामने आई कि संबंधित व्यक्ति PMO का अधिकृत अधिकारी है।
PMO ने साफ किया- कोई OSD नहीं है
मामले की जांच के दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से स्पष्ट किया गया कि रवि कांत शर्मा नाम का कोई व्यक्ति प्रधानमंत्री का OSD नहीं है। FIR में आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 204 और 319 के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66-D लगाई गई है। CBI के मुताबिक, फर्जी पहचान बनाकर प्रभाव डालने और कंप्यूटर संसाधनों के जरिए धोखाधड़ी करने के आरोपों की जांच की जा रही है। मामले की जांच CBI इंस्पेक्टर एमपी सिंह को सौंपी गई है।
CBI ने शुरू की मामले की जांच
CBI ने FIR में कहा है कि मरीजों को कथित प्राथमिकता आरोपी को PMO का अधिकृत अधिकारी समझे जाने के कारण मिली। एजेंसी अब आरोपी द्वारा इस्तेमाल किए गए संपर्क माध्यमों, डिजिटल विवरण और AIIMS से किए गए संवाद की जांच कर रही है। इससे पहले भी PMO से जुड़ी फर्जी पहचान का मामला सामने आ चुका है। 4 जून को CBI ने पी. एलंगोवन के खिलाफ कथित तौर पर PMO में अंडर सेक्रेटरी बनकर काम करने का मामला दर्ज किया था। उस मामले में एजेंसी ने 8 जनवरी को प्रारंभिक जांच शुरू की थी।