Spouse HRA Rules : केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बीच HRA यानी मकान किराया भत्ते को लेकर लंबे समय से कई सवाल रहते हैं। खासकर तब, जब पति-पत्नी दोनों सरकारी नौकरी में हों और दोनों की तैनाती एक ही शहर में हो। सरकार ने अब इस मामले में स्थिति साफ कर दी है।
एक को मिला सरकारी क्वार्टर तो क्या होगा
अगर पति-पत्नी दोनों केंद्रीय सरकारी कर्मचारी हैं और एक ही स्टेशन पर तैनात हैं, तो दोनों में से किसी एक को सरकारी आवास मिलने पर परिवार को सरकारी आवास उपलब्ध माना जाता है। ऐसी स्थिति में दूसरे कर्मचारी को अलग से HRA नहीं दिया जाता, क्योंकि सरकार के अनुसार आवास पर अलग किराये का खर्च नहीं हो रहा है।
किराये के मकान में रहने पर राहत
अगर पति-पत्नी सरकारी आवास में नहीं रह रहे हैं और नियमों के अनुसार किराये के मकान में रह रहे हैं, तो HRA की पात्रता अलग तरीके से तय होती है। यानी केवल शादीशुदा होने से HRA बंद नहीं हो जाता। असली सवाल यह है कि कर्मचारी को सरकारी आवास मिला है या नहीं और वह निर्धारित शर्तों को पूरा करता है या नहीं।
अलग शहर में तैनाती हो तो नियम अलग
पति-पत्नी की पोस्टिंग अलग-अलग शहरों में होने पर स्थिति बदल सकती है। ऐसी परिस्थिति में प्रत्येक कर्मचारी की आवास व्यवस्था और लागू नियमों के आधार पर HRA की पात्रता तय की जाती है। इसलिए अलग स्टेशन पर तैनात कर्मचारियों को अपने मामले में संबंधित विभाग के नियम जरूर देखने चाहिए।
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HRA की मौजूदा दरें भी जान लें
केंद्रीय कर्मचारियों के लिए HRA की मौजूदा दरें शहर की श्रेणी के अनुसार 30%, 20% और 10% हैं। ये क्रमशः X, Y और Z श्रेणी के शहरों के लिए लागू होती हैं। सबसे अहम बात यह है कि HRA का उद्देश्य किराये के आवास पर होने वाले खर्च की भरपाई करना है। इसलिए सरकारी क्वार्टर मिलने पर इसका लाभ रुकना नियमों की मूल भावना से जुड़ा है।