
उत्तराखंड के चमोली जिले के नंदानगर घाट क्षेत्र में देर रात बादल फटने और भारी बारिश ने कहर बरपा दिया। कुन्तरी लगाफाली, सरपाणी और धुर्मा गांव सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। इस आपदा में अब तक 12 लोगों के लापता होने की पुष्टि हुई है, जबकि कई घर और खेत-खलिहान मलबे में दब गए हैं।
तीन गांवों में तबाही का मंजर
नगर पंचायत नंदानगर के वार्ड कुन्तरी लगाफाली में भारी बारिश के बाद मलबा आने से कई घर पूरी तरह ध्वस्त हो गए। यहां से 8 लोगों के लापता होने और 3 लोगों के घायल होने की जानकारी मिली है। धुर्मा गांव में भी बादल फटने से भारी नुकसान हुआ, जहां कई मकान क्षतिग्रस्त हुए और 2 लोग लापता बताए गए। सरपाणी गांव में भी मलबे ने तबाही मचाई है। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस प्राकृतिक आपदा में कुल 32 घर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय हुए इस हादसे ने लोगों को संभलने का मौका तक नहीं दिया। कई परिवारों के मवेशी भी मलबे में दबकर मारे गए हैं।
बचाव में जुटी टीमें
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन सक्रिय हो गया। एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंची हैं और लगातार राहत व बचाव कार्य कर रही हैं। एनडीआरएफ की एक टीम गोचर से रवाना होकर नंदप्रयाग पहुंच चुकी है। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान अब तक 200 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। वहीं, मलबे में दबे लोगों को निकालने का प्रयास तेज कर दिया गया है।
ये भी पढ़ें : 17 साल बाद बनेगा पुलिस भर्ती बोर्ड, अब खुद कराएगी ‘सिपाही’ और ‘सब-इंस्पेक्टरों’ की भर्ती
मेडिकल टीम और एंबुलेंस मौके पर
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने बताया कि आपदा प्रभावित इलाकों में तुरंत चिकित्सा सहायता के लिए मेडिकल टीम भेज दी गई है। साथ ही, तीन 108 एंबुलेंस भी मौके पर पहुंच चुकी हैं। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है।
अभी नुकसान का पूरा अंदाजा नहीं
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि इस आपदा में हुए नुकसान का अभी पूरा आकलन नहीं हो पाया है। बचाव और राहत कार्य पूरा होने के बाद ही स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।
मौसम विभाग का अलर्ट
इसी बीच, मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के लिए भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी गढ़वाल, टिहरी, घनसाली, शिवपुरी, देवप्रयाग, ऋषिकेश, चंबा, मसूरी और धनोल्टी के कुछ इलाकों में गरज-तूफान और भारी वर्षा का पूर्वानुमान है। नंदानगर घाट की यह त्रासदी एक बार फिर याद दिलाती है कि पहाड़ी इलाकों में बादल फटने की घटनाएं कितनी विनाशकारी साबित हो सकती हैं। प्रशासन और बचाव दल पूरी कोशिश में हैं, लेकिन प्रभावित गांवों के लोग अभी भी डरे और सहमे हुए हैं।