Changes Brewing in Iran: ईरान इस समय गहरे राजनीतिक और आर्थिक दबाव से गुजर रहा है। महंगाई, बेरोजगारी और आज़ादी पर सख्ती के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन तेज हैं। इसी माहौल में निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी फिर से अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आ गए हैं। उन्होंने खुले तौर पर आंदोलन का समर्थन किया है, जिससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या ईरान में एक बार फिर सत्ता परिवर्तन या यहां तक कि राजशाही की वापसी संभव है।
कौन हैं रेजा पहलवी
रेजा पहलवी ईरान के अंतिम शाह मोहम्मद रेजा पहलवी के पुत्र हैं। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद वे देश छोड़कर अमेरिका में रहने लगे। बीते चार दशकों से वे लोकतंत्र, मानवाधिकार और धर्मनिरपेक्ष शासन की बात करते रहे हैं। हालिया प्रदर्शनों में उनकी सक्रियता ने उन्हें फिर से विपक्ष के संभावित चेहरे के रूप में उभारा है।
सेना और जनता से सीधी अपील
रेजा पहलवी ने ईरानी सेना और सुरक्षाबलों से अपील की है कि वे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा न करें। उनका कहना है कि सत्ता परिवर्तन केवल समय की बात है। उन्होंने ऐसे सैनिकों से जुड़ने के लिए एक डिजिटल मंच भी शुरू किया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि वे अंदरूनी समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।
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अंतरराष्ट्रीय समर्थन की कोशिश
पहलवी ने अमेरिका और यूरोप से ईरानी जनता के पक्ष में खुलकर बोलने की मांग की है। उनका आरोप है कि सरकार इंटरनेट और संचार माध्यम बंद कर विरोध की आवाज दबा रही है। अमेरिका ने भी संकेत दिए हैं कि वह शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के साथ खड़ा है, जिससे आंदोलन को नैतिक बल मिला है।
क्या वाकई लौटेगी राजशाही
ईरान में कुछ वर्ग राजशाही को स्थिरता के दौर से जोड़कर देखता है, लेकिन बड़ी आबादी अब भी उसे तानाशाही मानती है। रेजा पहलवी खुद कहते हैं कि भविष्य का फैसला जनता करेगी, चाहे व्यवस्था कोई भी हो। फिलहाल, उनकी बढ़ती सक्रियता ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि ईरान एक बड़े राजनीतिक मोड़ की ओर बढ़ रहा है।