Children Social Media Safety : बच्चों और किशोरों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर दुनियाभर में चिंता बढ़ रही है। ऑनलाइन बुलिंग, गलत या उम्र के हिसाब से अनुचित सामग्री, निजी जानकारी के गलत इस्तेमाल और अनजान लोगों से संपर्क जैसे खतरे बच्चों के लिए परेशानी पैदा कर सकते हैं। इसी वजह से कई देशों में बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर उम्र से जुड़ी पाबंदियों और सुरक्षा नियमों पर चर्चा तेज हुई है।
बच्चों के लिए सोशल मीडिया क्यों बन रहा चिंता का विषय
बच्चे ऑनलाइन दुनिया में काफी समय बिताते हैं और सोशल मीडिया पर दिखने वाली चीजों से जल्दी प्रभावित हो सकते हैं। यहां उन्हें पढ़ाई और मनोरंजन से जुड़ी अच्छी जानकारी मिल सकती है, लेकिन इसके साथ गलत भाषा, आपत्तिजनक सामग्री, साइबर बुलिंग और अनजान लोगों से बातचीत जैसे जोखिम भी मौजूद हैं। भारत सरकार ने भी सोशल मीडिया मंचों को बच्चों के लिए हानिकारक और गैरकानूनी सामग्री से जुड़े नियमों का पालन करने की याद दिलाई है।
कई देशों में उम्र को लेकर चर्चा तेज
दुनिया के कई हिस्सों में इस बात पर चर्चा चल रही है कि बच्चों को सोशल मीडिया इस्तेमाल करने की अनुमति किस उम्र से मिलनी चाहिए। कुछ जगहों पर कम उम्र के बच्चों के लिए रोक या माता-पिता की अनुमति जैसी व्यवस्था पर काम हुआ है। हालांकि, केवल उम्र की पाबंदी से बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित नहीं हो सकती। यूनिसेफ का कहना है कि उम्र से जुड़े नियमों के साथ मंचों की सुरक्षा व्यवस्था और माता-पिता की भूमिका भी जरूरी है।
माता-पिता बच्चों से खुलकर बात करें
बच्चे को केवल फोन चलाने से रोकना हमेशा पर्याप्त नहीं होता। माता-पिता को उनसे यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि वे कौन-से मंच इस्तेमाल करते हैं और वहां किस तरह की सामग्री देखते हैं। बच्चे को यह भी बताएं कि अपना फोन नंबर, पता, स्कूल की जानकारी, पासवर्ड या दूसरी निजी जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।
स्क्रीन टाइम के लिए घर में नियम बनाएं
बच्चे के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल का एक तय समय रखना मददगार हो सकता है। खाना खाते समय, पढ़ाई के दौरान और सोने से पहले फोन से दूरी रखने जैसे आसान नियम बनाए जा सकते हैं। यूनिसेफ भी बच्चों के स्क्रीन इस्तेमाल को लेकर परिवार में उचित सीमाएं तय करने और माता-पिता को खुद भी अच्छा उदाहरण पेश करने की सलाह देता है।
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माता-पिता खुद भी रखें इन बातों का ध्यान
सिर्फ बच्चों के खाते पर नजर रखना ही काफी नहीं है। माता-पिता को यह भी देखना चाहिए कि वे बच्चे की तस्वीरें और निजी जानकारी सोशल मीडिया पर कितनी साझा कर रहे हैं। बच्चे की तस्वीर, स्कूल, घर या रोजाना की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी आगे चलकर उसकी निजता को प्रभावित कर सकती है। इसलिए कुछ भी साझा करने से पहले बच्चे की निजता और उसकी सहमति को ध्यान में रखना जरूरी है।