China Aging Population Crisis : दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल चीन के सामने अब एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। यहां बच्चों की संख्या घट रही है, जबकि बुजुर्गों की आबादी लगातार बढ़ रही है। इसका सीधा असर आने वाले वर्षों में काम करने वाले लोगों की संख्या पर पड़ सकता है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि 2050 तक चीन में 20 से 60 साल की उम्र के लोगों की संख्या करीब 22.6 करोड़ घट सकती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब कामगार ही कम होंगे, तो चीन अपनी आर्थिक रफ्तार कैसे बनाए रखेगा?
बुजुर्गों की संख्या बच्चों से ज्यादा
चीन के नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में देश का ओल्ड-एज डिपेंडेंसी रेशियो 23.1 फीसदी रहा, जबकि बच्चों के मामले में यह आंकड़ा 22 फीसदी था। सरकारी मीडिया यिकाई की रिपोर्ट के अनुसार, चीन में 65 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों की संख्या 22.3 करोड़ से अधिक हो गई है। वहीं, 14 साल तक के बच्चों की संख्या करीब 21.3 करोड़ है। यानी चीन में अब बच्चों के मुकाबले बुजुर्गों का अनुपात ज्यादा हो गया है।
2050 तक घट सकते हैं 22.6 करोड़ कामगार
चीन की आबादी में बदलाव का सबसे बड़ा असर कामकाजी उम्र के लोगों पर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के मुताबिक, चीन में 20 से 60 साल की उम्र के लोगों की संख्या 2024 में करीब 84 करोड़ थी। अनुमान है कि 2050 तक यह घटकर 61.4 करोड़ रह सकती है। यानी इस आयु वर्ग में करीब 22.6 करोड़ लोगों की कमी आ सकती है। काम करने वाले लोगों की संख्या घटने से उद्योगों, सेवाओं और उत्पादन की रफ्तार पर दबाव बढ़ सकता है।
एक बच्चा नीति का भी असर
चीन में जन्मदर गिरने के पीछे कई वजहें हैं। इनमें 1980 से 2015 तक लागू रही एक बच्चा नीति और तेजी से बढ़ता शहरीकरण प्रमुख हैं। लंबे समय तक परिवारों में बच्चों की संख्या सीमित रहने से आबादी का ढांचा बदल गया। अब देश में बुजुर्गों की हिस्सेदारी बढ़ रही है और नई पीढ़ी का आकार घट रहा है। साल 2025 में चीन की आबादी लगातार चौथे साल कम हुई और जन्मदर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। इससे सरकार की चिंता और बढ़ गई है।
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जन्मदर बढ़ाने के लिए सरकार की कोशिशें
चीन की सरकार लोगों को शादी करने और बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करने की कोशिश कर रही है। इसके तहत परिवारों को आर्थिक मदद देने, बच्चों की देखभाल की सुविधाएं बढ़ाने और जन्म से जुड़े इलाज का खर्च कम करने जैसे कदम उठाए गए हैं। शहरों में भी परिवारों के लिए सुविधाएं बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि, इन कोशिशों के बावजूद जन्मदर में लगातार गिरावट चीन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। अब सवाल है कि क्या सरकारी योजनाएं इस रुझान को बदल पाएंगी?
बुजुर्गों का खर्च और अर्थव्यवस्था की चुनौती
बुजुर्गों की बढ़ती संख्या के साथ उनके इलाज, देखभाल और दूसरी जरूरतों पर खर्च भी बढ़ सकता है। दूसरी तरफ, कामकाजी लोगों की संख्या घटने से देश के लिए उत्पादन और आर्थिक विकास की रफ्तार बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। चीन के सामने अब दोहरी चुनौती है—एक तरफ जन्मदर बढ़ाना और दूसरी तरफ घटती कामकाजी आबादी के बीच अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखना। सरकार की कोशिशें कितनी सफल होंगी, यह आने वाले वर्षों में पता चलेगा। फिलहाल, चीन की तेजी से बूढ़ी होती आबादी उसके आर्थिक भविष्य के लिए बड़ा सवाल बन गई है।