चीन ने बीफ आयात को लेकर ऐसा फैसला लिया है, जिसने ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका दोनों की टेंशन बढ़ा दी है। बीजिंग ने ऐलान किया है कि तय सीमा से ज्यादा बीफ आयात पर वह 55 फीसदी तक अतिरिक्त टैरिफ लगाएगा। यह नियम अगले तीन वर्षों तक लागू रहेगा और इसमें ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे बड़े निर्यातक देश शामिल हैं। ऑस्ट्रेलियाई सरकार इस फैसले से खासा नाराज है और उसे अपने निर्यात पर बड़ा आर्थिक झटका लगने की आशंका है। हालांकि इस टैरिफ के दायरे में भारत नहीं आता, इसलिए भारत पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा।
ऑस्ट्रेलिया की नाराजगी और व्यापार का डर
ऑस्ट्रेलिया के व्यापार मंत्री ने साफ कहा है कि चीन का यह फैसला निराशाजनक है। उनका कहना है कि ऑस्ट्रेलियाई बीफ चीन के घरेलू उद्योग के लिए कोई खतरा नहीं है और दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते की भावना के खिलाफ यह कदम है। ऑस्ट्रेलिया के लिए चीन अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा बीफ बाजार है। नए नियमों के तहत 2026 के लिए बीफ का कोटा तय किया जाएगा, जिससे निर्यात में भारी कटौती हो सकती है। उद्योग समूहों का अनुमान है कि इससे एक अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर से ज्यादा के व्यापार पर असर पड़ सकता है।
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चीन की दलील और आर्थिक वजहें
चीन का कहना है कि बीफ आयात में तेजी से उसके घरेलू उद्योग को नुकसान हुआ है। हाल के वर्षों में चीन में बीफ की कीमतें गिरी हैं, जिसकी वजह ज्यादा सप्लाई और मांग में कमी बताई जा रही है। विश्लेषकों के मुताबिक चीन की अर्थव्यवस्था इस समय दबाव में है और मंदी के संकेत भी दिख रहे हैं। इसी कारण चीन अपने घरेलू उत्पादकों को बचाने के लिए आयात पर सख्ती कर रहा है। ऑस्ट्रेलियाई बीफ इंडस्ट्री का दावा है कि नए टैरिफ से चीन को होने वाला निर्यात करीब एक तिहाई तक घट सकता है।
QUAD की राजनीति और भारत की स्थिति
इस फैसले का असर सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे QUAD जैसे रणनीतिक समूह से भी जोड़कर देखा जा रहा है। QUAD में अमेरिका, जापान, भारत और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं और इसका मकसद हिंद-प्रशांत क्षेत्र में संतुलन बनाए रखना है। ऑस्ट्रेलिया पहले भी चीन के साथ कई मुद्दों पर टकराव में रहा है, चाहे वह 5G नेटवर्क से हुआवेई को बाहर करना हो या कोविड जांच की मांग। मौजूदा टैरिफ फैसले से QUAD के भीतर तनाव बढ़ने की आशंका है, हालांकि भारत इस पूरे घटनाक्रम में फिलहाल सुरक्षित और बेफिक्र नजर आ रहा है।