दुनिया की अर्थव्यवस्था में समुद्री व्यापार की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है। मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े और रोजमर्रा का सामान बड़े पैमाने पर बंदरगाहों के जरिए एक देश से दूसरे देश तक पहुंचता है। ऐसे में दुनिया के सबसे व्यस्त बंदरगाह किसी भी देश की आर्थिक ताकत माने जाते हैं। साल 2024 के आंकड़ों ने एक बार फिर दिखा दिया है कि समुद्री व्यापार के मोर्चे पर चीन ने लगभग एकतरफा कब्जा जमा लिया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि दुनिया के टॉप 20 सबसे बिजी बंदरगाहों की सूची में भारत का एक भी पोर्ट जगह नहीं बना सका।
टॉप 10 में चीन का दबदबा
रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के 10 सबसे व्यस्त बंदरगाहों में से 7 अकेले चीन के हैं। वैश्विक कंटेनर ट्रैफिक में चीन की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से ज्यादा पहुंच चुकी है। शंघाई पोर्ट 51.5 मिलियन टीईयू कंटेनर प्रोसेसिंग के साथ दुनिया का सबसे व्यस्त बंदरगाह बना हुआ है। दूसरे नंबर पर सिंगापुर का पोर्ट है, जिसने 41.1 मिलियन टीईयू का ट्रैफिक संभाला। तीसरे स्थान पर चीन का निंगबो-झोउशान पोर्ट रहा। इससे साफ है कि वैश्विक समुद्री व्यापार के सबसे बड़े केंद्र अब एशिया और खासतौर पर चीन बन चुके हैं।
हर तरफ दिखा चीनी कंट्रोल
चीन का शेनझेन पोर्ट चौथे और क़िंगदाओ पोर्ट पांचवें स्थान पर रहा। छठे नंबर पर भी चीन का ग्वांगझोउ बंदरगाह शामिल है। दक्षिण कोरिया का बुसान पोर्ट सातवें स्थान पर जरूर पहुंचा, लेकिन इसके बाद फिर चीन का तियानजिन पोर्ट आठवें नंबर पर दिखाई दिया। इससे यह साफ होता है कि चीन ने सिर्फ व्यापार ही नहीं बल्कि समुद्री लॉजिस्टिक्स नेटवर्क पर भी मजबूत पकड़ बना ली है। दुनिया के बड़े कारोबारी रास्तों पर चीन की मौजूदगी लगातार बढ़ती जा रही है।
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दूसरे देशों की सीमित मौजूदगी
यूएई का जेबेल अली पोर्ट नौवें और मलेशिया का पोर्ट क्लांग दसवें स्थान पर रहे। यूरोप के बड़े बंदरगाह भी अब एशियाई पोर्ट्स से पीछे छूटते दिखाई दे रहे हैं। नीदरलैंड का रॉटरडैम पोर्ट 11वें नंबर पर पहुंच गया, जबकि बेल्जियम का एंटवर्प-ब्रुग्स पोर्ट 13वें स्थान पर रहा। अमेरिका का लॉस एंजेलिस पोर्ट भी 16वें नंबर तक सिमट गया। इससे साफ दिख रहा है कि समुद्री व्यापार की ताकत धीरे-धीरे एशिया की ओर शिफ्ट हो चुकी है।
भारत के लिए बढ़ी चुनौती
भारत लगातार अपने बंदरगाहों के आधुनिकीकरण और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। कई नए पोर्ट प्रोजेक्ट्स और कॉरिडोर पर काम भी जारी है। इसके बावजूद दुनिया के टॉप 20 बंदरगाहों में किसी भारतीय पोर्ट का शामिल न होना चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत को वैश्विक व्यापार में बड़ी ताकत बनना है, तो समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर को और तेज गति से विकसित करना होगा।
लंबी दूरी तय करनी बाकी
चीन ने जिस रफ्तार से अपने बंदरगाहों को आधुनिक बनाया और वैश्विक सप्लाई चेन पर पकड़ मजबूत की, उसने बाकी देशों के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। भारत के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वह आने वाले वर्षों में इस समुद्री मुकाबले में चीन को चुनौती दे पाएगा या नहीं। फिलहाल तस्वीर यही दिखा रही है कि समंदर के रास्ते दुनिया के व्यापार पर ड्रैगन का दबदबा लगातार बढ़ता जा रहा है।