आज के समय में क्रेडिट कार्ड लोगों की जरूरत बन चुका है। कई लोग महीने का खर्च संभालने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं, लेकिन जरूरत से ज्यादा खर्च कई बार बड़ी परेशानी खड़ी कर देता है। जब कार्ड का बिल समय पर जमा नहीं हो पाता तो ब्याज और लेट फीस लगातार बढ़ने लगती है। धीरे-धीरे रकम इतनी ज्यादा हो जाती है कि ग्राहक पर आर्थिक दबाव बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में बैंक कई बार ग्राहकों को क्रेडिट कार्ड सैटलमेंट का ऑफर देने लगते हैं, जिसे लोग तुरंत राहत मान लेते हैं।
क्या होता है सैटलमेंट
क्रेडिट कार्ड सैटलमेंट का मतलब होता है कि बैंक पूरा बकाया वसूलने की बजाय कम रकम लेकर अकाउंट बंद करने को तैयार हो जाता है। अगर किसी ग्राहक पर 1 लाख रुपये बकाया है तो बैंक उससे 40 या 50 हजार रुपये लेकर मामला खत्म करने का प्रस्ताव दे सकता है। इसके बाद कार्ड अकाउंट बंद कर दिया जाता है। यह सुविधा आमतौर पर उन ग्राहकों को दी जाती है जो लंबे समय से भुगतान नहीं कर पा रहे होते हैं और बैंक को पूरा पैसा वापस मिलने की उम्मीद कम दिखाई देती है।
सैटलमेंट के फायदे
क्रेडिट कार्ड सैटलमेंट आर्थिक संकट से जूझ रहे लोगों के लिए कुछ राहत जरूर देता है। सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि ग्राहक को पूरी रकम नहीं चुकानी पड़ती। बढ़ते ब्याज और भारी लेट फीस से भी राहत मिल जाती है। इसके अलावा रिकवरी एजेंट्स की कॉल और कानूनी नोटिस जैसी परेशानियां भी कम हो सकती हैं। जिन लोगों की नौकरी चली गई हो या जिनकी आमदनी अचानक कम हो गई हो, उनके लिए यह विकल्प अस्थायी राहत देने वाला साबित हो सकता है।
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सबसे बड़ा नुकसान क्या
हालांकि सैटलमेंट का सबसे बड़ा नुकसान आपके सिबिल स्कोर पर पड़ता है। बैंक आपके अकाउंट को “सेटल्ड” के रूप में रिपोर्ट करता है, ना कि “क्लोज्ड” या “फुली पेड” के रूप में। इससे भविष्य में बैंक आपको जोखिम वाले ग्राहक की तरह देखने लगते हैं। कई बार होम लोन, कार लोन या नया क्रेडिट कार्ड लेने में दिक्कत आती है। कुछ बैंक ऐसे ग्राहकों के आवेदन सीधे रिजेक्ट भी कर देते हैं। इसका असर कई साल तक बना रह सकता है।
फैसला लेने से पहले सोचें
अगर आपके पास धीरे-धीरे पूरा भुगतान करने की क्षमता है तो सैटलमेंट से बचना बेहतर माना जाता है। कोशिश करें कि बैंक से ईएमआई या री-स्ट्रक्चरिंग जैसे विकल्पों पर बात करें। इससे आपका सिबिल स्कोर ज्यादा खराब नहीं होता। लेकिन अगर आर्थिक स्थिति बेहद खराब है और कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है, तब सैटलमेंट आखिरी विकल्प हो सकता है। किसी भी फैसले से पहले उसके फायदे और नुकसान दोनों समझना जरूरी है।
भविष्य पर पड़ सकता असर
क्रेडिट कार्ड सैटलमेंट तुरंत राहत जरूर देता है, लेकिन इसका असर लंबे समय तक आपके वित्तीय रिकॉर्ड पर दिखाई देता है। कई लोग बिना जानकारी के सिर्फ कम रकम देखकर सैटलमेंट कर लेते हैं और बाद में लोन लेने में परेशानियां झेलते हैं। इसलिए किसी भी ऑफर को स्वीकार करने से पहले बैंक से पूरी जानकारी लें और समझदारी से फैसला करें, ताकि भविष्य में आर्थिक मुश्किलें और ज्यादा न बढ़ें।