चीन ने ताइवान के समुद्री और हवाई इलाकों में ऐसा सैन्य अभ्यास किया है जो असली युद्ध की तैयारी जैसा दिखता है। पीएलए ने ताइवान को चारों ओर से घेरते हुए दो दिन की बड़ी मिलिट्री ड्रिल चलाई। इस दौरान करीब 10 घंटे तक लंबी दूरी की लाइव फायरिंग की गई। चीनी सेना ने ताइवान के प्रमुख बंदरगाहों की नाकेबंदी का अभ्यास किया, जिससे यह साफ संकेत मिला कि ड्रैगन किसी भी हालात के लिए तैयार है।
बंदरगाहों की नाकेबंदी का अभ्यास
इन सैन्य अभ्यासों में ताइवान के अहम बंदरगाहों कीलुंग और काओशुंग को ब्लॉक करने का अभ्यास शामिल रहा। सोमवार को पीएलए के ईस्टर्न थिएटर कमांड ने नौसेना और वायुसेना के साथ मिलकर जॉइंट ड्रिल की। इसमें समुद्र और जमीन पर मौजूद लक्ष्यों पर नकली हमले, एयर कंट्रोल ऑपरेशन और एंटी सबमरीन मिशन पर फोकस किया गया। मंगलवार को यह अभ्यास और तेज हुआ और समुद्र में लंबी दूरी के रॉकेट दागे गए।
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सूचना युद्ध और वांग यी का बयान
सैन्य ताकत के साथ चीन ने ताइवान के खिलाफ सूचना युद्ध भी तेज कर दिया है। चीनी सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि इस अभियान का मकसद दुनिया को यह दिखाना है कि ताइवान की सेना पीएलए का सामना नहीं कर सकती। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने साफ कहा कि ताइवान का मुद्दा चीन का आंतरिक मामला है। उन्होंने कहा कि ताइवान का पूरी तरह एकीकरण करना और राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा करना चीन का ऐतिहासिक मिशन है जिसे हर हाल में पूरा किया जाएगा।
अमेरिकी हथियार डील से भड़का ड्रैगन
चीन की यह आक्रामकता अमेरिका द्वारा ताइवान को 11 बिलियन डॉलर के हथियार बेचने की घोषणा के बाद और बढ़ गई है। इस डील में लंबी दूरी की मिसाइलें, रॉकेट आर्टिलरी सिस्टम और निगरानी उपकरण शामिल हैं। ताइवान के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक 24 घंटे में 130 चीनी विमान, 14 नौसैनिक जहाज और आठ सरकारी जहाज ताइवान के आसपास देखे गए। इनमें से 90 उड़ानें ताइवान के एयर डिफेंस जोन में घुसीं। हालात को देखते हुए ताइवान ने दर्जनों घरेलू उड़ानें रद्द कर दीं और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में देरी की चेतावनी दी है। यह सब संकेत दे रहा है कि एशिया में तनाव तेजी से बढ़ रहा है।