Venezuela crisis: वेनेजुएला में अमेरिका की सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को बंधक बनाए जाने की घटना ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में तनाव बढ़ा दिया है। इस पूरे घटनाक्रम पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने इसे न सिर्फ वेनेजुएला की संप्रभुता पर हमला बताया, बल्कि पूरी वैश्विक व्यवस्था के लिए चिंताजनक करार दिया। बीजिंग के नजरिए से यह मामला केवल एक देश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बड़ी शक्तियों द्वारा एकतरफा दबाव और हस्तक्षेप की बढ़ती प्रवृत्ति का उदाहरण है।
दुनिया अस्थिर दौर से गुजर रही है
चीनी सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि दुनिया इस समय ऐसे बदलावों और उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है, जैसा पिछले सौ वर्षों में नहीं देखा गया। उन्होंने बिना नाम लिए अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ देश अपनी ताकत के दम पर अंतरराष्ट्रीय नियमों को कमजोर कर रहे हैं। शी जिनपिंग ने जोर दिया कि इस तरह की “एकतरफा दादागिरी” वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है और इससे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में असंतुलन पैदा हो रहा है।
संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून पर दिया जोर
आयरिश प्रधानमंत्री माइकल मार्टिन के साथ बातचीत के दौरान शी जिनपिंग ने कहा कि सभी देशों को दूसरे देशों के नागरिकों द्वारा चुने गए विकास के रास्ते का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का पालन करना खासतौर पर बड़ी शक्तियों की जिम्मेदारी है। चीन ने पहले भी अमेरिका से मादुरो और उनकी पत्नी को तत्काल रिहा करने की मांग की थी और इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया था। चीन का मानना है कि वेनेजुएला को बिना बाहरी दबाव के अपने राजनीतिक और आर्थिक फैसले लेने का पूरा अधिकार है। बीजिंग और काराकास के बीच लंबे समय से ऊर्जा, निवेश और रणनीतिक सहयोग रहा है, ऐसे में यह संकट चीन के लिए भी एक बड़ा भू-राजनीतिक झटका माना जा रहा है।