यूरोप के ऑटो बाजार में चीनी कंपनियों ने जबरदस्त पकड़ बना ली है। मार्च 2026 में चीन की प्लग इन हाइब्रिड गाड़ियों की बिक्री में सालाना आधार पर करीब 300 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस तेजी के साथ ही हाइब्रिड मार्केट में उनकी हिस्सेदारी बढ़कर 20 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इससे पहले 2024 की शुरुआत में यह आंकड़ा केवल 2 प्रतिशत था, जो अब कई गुना बढ़ चुका है।
कुल बिक्री में भी बड़ा उछाल
चीन की ऑटो कंपनियों की कुल बिक्री भी यूरोप में तेजी से बढ़ रही है। मार्च के महीने में चीनी कंपनियों ने लगभग 140094 गाड़ियां बेचीं, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 100 प्रतिशत अधिक है। इसके साथ ही यूरोप के कुल कार बाजार में उनकी हिस्सेदारी बढ़कर 9.4 प्रतिशत हो गई है, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है।
कम कीमत बनी सबसे बड़ी ताकत
चीनी कंपनियों की सबसे बड़ी ताकत उनकी कम कीमत है। ये कंपनियां यूरोपियन ब्रांड्स के मुकाबले काफी सस्ती गाड़ियां पेश कर रही हैं, लेकिन फीचर्स और तकनीक के मामले में किसी से कम नहीं हैं। यही वजह है कि यूरोप के ग्राहक तेजी से चीनी गाड़ियों की ओर आकर्षित हो रहे हैं और स्थानीय ब्रांड्स को कड़ी चुनौती मिल रही है।
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ईवी रणनीति में यूरोप पीछे
विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोपीय कंपनियों ने इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों की रणनीति बनाने में काफी समय गंवाया। वहीं चीन की कंपनियों ने तेजी से बाजार में सस्ती और आधुनिक गाड़ियां उतार दीं। खासतौर पर बीवाईडी जैसी कंपनियों ने आधी कीमत पर गाड़ियां लॉन्च कर यूरोप में अपनी मजबूत पकड़ बना ली है।
उत्पादन में भी चीन अव्वल
गाड़ियों के उत्पादन के मामले में भी चीन दुनिया में पहले स्थान पर है। वहां हर साल करीब 2.43 करोड़ गाड़ियों का निर्माण होता है। इसके बाद अमेरिका, जापान, भारत और जर्मनी जैसे देश आते हैं। बड़े स्तर पर उत्पादन की वजह से भी चीन लागत कम रखने में सफल रहा है।
आने वाले समय की तस्वीर
अगर यही रफ्तार बनी रही, तो आने वाले समय में यूरोप के ऑटो बाजार में चीन की पकड़ और मजबूत हो सकती है। सस्ती कीमत, बेहतर तकनीक और तेज रणनीति के दम पर चीनी कंपनियां वैश्विक बाजार में अपनी अलग पहचान बना रही हैं। यह बदलाव ऑटो इंडस्ट्री के लिए एक बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।