CJI Gavai makes a major announcement: मुख्य न्यायाधीश के पद से रिटायर होने के बाद बीआर गवई ने साफ कहा कि वह अब कोई भी सरकारी पद स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर जोर देते हुए कहा कि अक्सर यह आरोप लगाया जाता है कि अगर जज सरकार के पक्ष में फैसला देते हैं तो वे स्वतंत्र नहीं होते, लेकिन यह धारणा बिल्कुल गलत है। गवई ने बताया कि अदालत फैसले कानून और संविधान के आधार पर ही देती है, न कि सरकार या किसी दबाव के तहत। उन्होंने आरक्षण व्यवस्था पर भी अपनी राय रखते हुए कहा कि SC-ST के आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू होना ज़रूरी है, ताकि वास्तविक रूप से वंचित लोगों को इसका लाभ मिल सके।
राष्ट्रपति संदर्भ और कॉलेजियम पर स्पष्टीकरण
गवई ने सेवानिवृत्ति के बाद यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति संदर्भ वाले फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने पहले के किसी निर्णय को पलटा नहीं है। उन्होंने कहा कि दो जजों की पीठ के निर्णय को बदला नहीं गया, बल्कि भविष्य के लिए स्पष्ट कर दिया गया है कि राज्यपाल और राष्ट्रपति के पास विधेयक लंबित रहने की कोई समय-सीमा तय करना संभव नहीं है। उन्होंने कॉलेजियम प्रणाली का समर्थन करते हुए कहा कि नियुक्तियों का अधिकार अगर कार्यपालिका के पास चला गया तो न्यायिक स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। इसलिए वर्तमान व्यवस्था न्यायपालिका की स्वायत्तता के लिए बेहतर है।
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रिटायरमेंट पर कही बात
CJI गवई ने सोशल मीडिया को आज की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि कई बार वे बातें भी उनके नाम से लिख दी जाती हैं, जो उन्होंने कही ही नहीं होतीं। यह समस्या सिर्फ अदालत तक सीमित नहीं है बल्कि सरकार के अन्य अंग भी इससे प्रभावित होते हैं। गवई के कार्यकाल को खास इसलिए भी माना जाता है क्योंकि वह देश के दूसरे दलित मुख्य न्यायाधीश रहे। उनका जन्म महाराष्ट्र के अमरावती में हुआ था। 2019 में वे सुप्रीम कोर्ट के जज बने और मई 2025 में देश के 52वें मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में बिताए अपने समय को वह हमेशा गर्व के साथ याद करें