CM Mohan Yadav: मध्य प्रदेश की पर्यावरणीय मंजूरी से जुड़ा बड़ा विवाद अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंच गया है। SEIAA चेयरमैन शिवनारायण सिंह चौहान और पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी के बीच गंभीर मतभेद सामने आए हैं। मामला 450 प्रकरणों में बिना अथॉरिटी की बैठक के पर्यावरणीय मंजूरी देने को लेकर है। सिया चेयरमैन ने प्रमुख सचिव पर नियमविरुद्ध कार्य करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर की सिफारिश तक कर दी है। अब मुख्यमंत्री इस विवाद पर उच्च स्तरीय समीक्षा कर सकते हैं।
क्या है पूरा मामला?
23 मई को खनिज, उद्योग और निर्माण कार्यों से जुड़े करीब 450 प्रोजेक्ट्स को पर्यावरणीय मंजूरी दी गई थी। SEIAA चेयरमैन शिवनारायण सिंह चौहान का आरोप है कि बिना अथॉरिटी की बैठक बुलाए, प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी और पर्यावरण विभाग ने अपने स्तर पर मंजूरी जारी कर दी। उन्होंने दावा किया कि सिया को दरकिनार कर डीम्ड अप्रूवल देकर नियमों की अनदेखी की गई है।
सिया चेयरमैन का आरोप
चेयरमैन का कहना है कि विभाग ने 700 में से 237 प्रकरणों को पिक एंड चूज़ पैटर्न पर मंजूरी दी, जो पूरी तरह से गैरकानूनी है। उन्होंने दो बार बैठक बुलाने के लिए पत्र लिखा था, परंतु 70 दिनों में एक भी बैठक नहीं बुलाई गई, जबकि नियम के अनुसार 45 दिन में बैठक अनिवार्य है। उन्होंने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर पूरी जानकारी साझा की है।
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ऑफिस सील करने का आरोप
शिवनारायण सिंह चौहान ने यह भी आरोप लगाया कि सोमवार सुबह उनका कार्यालय सील कर दिया गया था, ताकि वह अनियमितताओं को उजागर न कर सकें। उन्होंने कहा कि दोपहर में विरोध के बाद दफ्तर खोला गया। वहीं, प्रमुख सचिव कोठारी का कहना है कि कार्यालय में बिजली फॉल्ट के कारण कक्ष बंद किया गया था।
सीएम करेंगे समीक्षा
अब यह गंभीर मामला मुख्यमंत्री तक पहुंच चुका है। उम्मीद जताई जा रही है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस पूरे विवाद की कल उच्च स्तरीय समीक्षा कर सकते हैं। यदि आरोपों में दम पाया गया तो संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो सकती है।