लखनऊ के जनेश्वर मिश्र पार्क में आयोजित “दिव्य गीता प्रेरणा उत्सव” के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आरएसएस की फंडिंग को लेकर उठ रहे सवालों पर बड़ा बयान दिया। योगी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पिछले 100 वर्षों से समाज के सहयोग से चल रहा है और इसे न तो किसी देश से और न ही किसी बड़े संगठन से फंडिंग मिलती है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग सेवा को सौदेबाजी का माध्यम बना देते हैं, लेकिन आरएसएस ने कभी सौदेबाजी नहीं की। योगी के अनुसार, लोग निःस्वार्थ भाव से संघ से जुड़ते हैं और राष्ट्रहित के लिए सहयोग करते हैं।
गीता का ज्ञान और समाज में उसकी भूमिका
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम में कहा कि श्रीमद्भागवत गीता जीवन जीने की कला सिखाती है। उन्होंने कहा कि धर्म को हमने कभी केवल उपासना विधि नहीं माना, बल्कि यह जीवन चलाने का मार्ग है। उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया को “वसुधैव कुटुंबकम्” और “जीयो और जीने दो” का संदेश दिया है। CM योगी ने कहा कि अच्छे कर्म का फल अच्छा और बुरे कर्म का फल बुरा मिलता है—ये बातें गीता हमें समझाती है। उन्होंने स्मार्ट सिटी के संदर्भ में कहा कि स्मार्ट सिटी तभी सार्थक है जब नागरिक स्मार्ट हों, और गीता का ज्ञान व्यक्ति को स्मार्ट और सजग बनाता है।
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संदेश को घर-घर पहुंचाने का संकल्प
सीएम योगी ने कहा कि गीता का संदेश समाज के हर वर्ग, हर क्षेत्र और हर परिवार तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने बताया कि 140 करोड़ भारतीयों के जीवन में गीता का ज्ञान आवश्यक है और इसे शिक्षा प्रणाली में भी शामिल किया जाना चाहिए ताकि बच्चे बचपन से संस्कारित बन सकें। कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी शामिल हुए। योगी ने कहा कि सनातन विचार आज फिर उभर रहा है और स्वार्थ आधारित राजनीति धीरे-धीरे समाप्त हो रही है।