Coaching centers: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल कर बताया है कि देशभर के कोचिंग सेंटरों की फीस और हर एक गतिविधि की निगरानी की जाएगी। सरकार ने यह कदम छात्रों में आत्महत्या के बढ़ते मामलों और उनके मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं को देखते हुए उठाया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने यह हलफनामा सुप्रीम कोर्ट द्वारा 27 अक्टूबर को दिए गए आदेश के अनुपालन में दाखिल किया है, जिसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से निपटने के लिए निर्धारित दिशानिर्देशों को लागू करने का निर्देश दिया गया था। सरकार ने कोर्ट को सूचित किया है कि राष्ट्रीय कार्यबल (एनटीएफ) छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी अपनी अंतिम रिपोर्ट दिसंबर में कोर्ट में पेश करेगा, जिसके आधार पर दिशानिर्देशों को और बेहतर किया जाएगा।
निगरानी और दिशानिर्देशों का दायरा
केंद्र सरकार ने पूर्व में जारी किए गए दिशानिर्देशों का ब्यौरा दिया है, जिनका उद्देश्य कोचिंग सेंटरों में छात्रों के हितों की रक्षा करना है। इन दिशानिर्देशों में कोचिंग केंद्रों की परिभाषा, पंजीकरण की शर्तें, आवश्यक दस्तावेज़, शुल्क से संबंधित स्पष्ट नियम और बुनियादी ढांचे की रूपरेखा शामिल है। इसके अलावा, दिशानिर्देशों में कोचिंग सेंटरों के लिए आचार संहिता का पालन करना, छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर ज़ोर देना, काउंसलरों और मनोवैज्ञानिकों के सहयोग को प्राथमिकता देना और बैचों में विभाजन न करना भी शामिल है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कोर्ट के दिशानिर्देशों से अवगत करा दिया गया है और वे जिला निगरानी समिति का गठन कर रहे हैं।
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सतत निगरानी और दंड का प्रावधान
हलफनामे में बताया गया है कि दिशानिर्देशों में कोचिंग केंद्रों की गतिविधियों की निरंतर निगरानी, एक मजबूत शिकायत निवारण तंत्र और उसके निपटान की व्यवस्था का प्रावधान है। इसमें नियमों का उल्लंघन करने पर दंड, पंजीकरण रद्द करने और अपील की प्रक्रिया भी शामिल है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने केंद्र को यह जिम्मेदारी सौंपी थी कि वह दो महीने के भीतर सभी निजी कोचिंग केंद्रों के लिए पंजीकरण, छात्र सुरक्षा मानदंड और शिकायत निवारण तंत्र के नियमों को अधिसूचित करे। सरकार ने पुष्टि की है कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर एनटीएफ की रिपोर्ट दिसंबर, 2025 तक तैयार होकर कोर्ट में पेश कर दी जाएगी।