Hydrogen Bomb: हाइड्रोजन बम, जिसे थर्मोन्यूक्लियर बम भी कहा जाता है, परमाणु बम से कहीं ज़्यादा खतरनाक और शक्तिशाली होता है। इसकी विनाशकारी क्षमता परमाणु बम की तुलना में सैकड़ों से लेकर हजारों गुना अधिक हो सकती है। जहाँ परमाणु बम की क्षमता किलोटन (हजारों टन टीएनटी) में मापी जाती है, वहीं हाइड्रोजन बम की क्षमता मेगाटन (लाखों टन टीएनटी) में मापी जाती है। उदाहरण के लिए, हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम की ताकत लगभग 15 किलोटन थी, जबकि सबसे बड़े परीक्षण किए गए हाइड्रोजन बम की ताकत 50 मेगाटन से भी अधिक थी। अमेरिका ने 1950 के दशक में 10,000 किलोटन या उससे ज़्यादा क्षमता वाले हाइड्रोजन बमों का पहला सफल परीक्षण किया था।
हाइड्रोजन बम क्यों है ख़ास और ज्यादा विध्वंसक?
परमाणु बम केवल नाभिकीय विखंडन (Fission) पर निर्भर करते हैं, जबकि हाइड्रोजन बम विखंडन और नाभिकीय संलयन (Fusion) दोनों का उपयोग करता है, जिससे अधिक विस्फोटक ऊर्जा उत्पन्न होती है। संलयन वही प्रक्रिया है जो सूर्य और अन्य तारों को ऊर्जा देती है, और इसे प्रेरित करने के लिए अत्यधिक उच्च तापमान की आवश्यकता होती है। अपनी उच्च शक्ति के कारण, हाइड्रोजन बम को इतना छोटा बनाया जा सकता है कि वह किसी अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल के शीर्ष पर फिट हो सके, जबकि जापान पर गिराए गए परमाणु बम बहुत बड़े थे। रूस, अमेरिका, फ़्रांस, चीन और ब्रिटेन सहित सबसे ज़्यादा परमाणु हथियार क्षमता वाले पांच देशों के लिए हाइड्रोजन बम ही मानक है।
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विनाश का भयानक दायरा
हाइड्रोजन बम के विस्फोट से उत्पन्न होने वाली शॉक वेव्स, गर्मी और रेडिएशन का प्रभाव क्षेत्र परमाणु बम की तुलना में बहुत बड़ा होता है। जहाँ एक परमाणु बम से एक मील के दायरे में सब कुछ नष्ट हो सकता है, वहीं एक हाइड्रोजन बम का विनाशक दायरा 5 से 10 मील या उससे भी अधिक हो सकता है, जो पूरे शहर को तबाह करने में सक्षम है। विस्फोट के दौरान उत्पन्न अत्यधिक तापमान (जो सूर्य की सतह से भी अधिक होता है) अपने आस-पास की हर चीज़ को तुरंत वाष्पीकृत कर देता है। संक्षेप में, हाइड्रोजन बम आधुनिक समय में बनाए गए सबसे विनाशकारी हथियार हैं, जो एक झटके में लाखों लोगों की जान ले सकते हैं और पर्यावरण पर लंबे समय तक घातक प्रभाव छोड़ सकते हैं।