देश में कोयले को सिर्फ बिजली उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय अब उससे हाइड्रोजन, एथेनॉल और कई औद्योगिक उत्पाद बनाने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। सरकार के मुताबिक 65 हजार करोड़ रुपये से अधिक के कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू हो चुका है। इन परियोजनाओं के जरिए कोयले को गैस में बदलकर कई उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाएंगे, जिससे ऊर्जा और उद्योग दोनों क्षेत्रों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
किन उत्पादों का होगा उत्पादन?
इन प्रोजेक्ट्स के जरिए सिंथेटिक नेचुरल गैस, एथेनॉल, हाइड्रोजन, एसिटिक एसिड, अमोनियम नाइट्रेट, स्टील उद्योग के लिए जरूरी कच्चा माल और विमानन क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाला टिकाऊ ईंधन तैयार किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे देश के औद्योगिक उत्पादन को नई ताकत मिलेगी और आयात पर होने वाला खर्च भी कम होगा।
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2030 तक बड़ा लक्ष्य
सरकार ने वर्ष 2030 तक 10 करोड़ टन कोयले के गैसीफिकेशन का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए करीब 25 बड़े प्रोजेक्ट्स विकसित किए जाने की योजना है। अनुमान है कि इन परियोजनाओं में 2.5 लाख करोड़ से 3 लाख करोड़ रुपये तक का निवेश आकर्षित हो सकता है। इसके अलावा सरकार नए प्रोत्साहन कार्यक्रम को भी अंतिम रूप दे रही है ताकि निजी क्षेत्र की भागीदारी और बढ़ सके।
आम लोगों को क्या होगा फायदा?
अगर यह योजना सफल रहती है तो देश में हाइड्रोजन, एथेनॉल और अन्य औद्योगिक उत्पादों का घरेलू उत्पादन बढ़ेगा। इससे विदेशों से ईंधन और केमिकल आयात की जरूरत घट सकती है। लंबे समय में इससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, उद्योगों को कच्चा माल आसानी से मिलेगा और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं। सरकार इसे भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में एक अहम कदम मान रही है।